47 अध्याय · 469 श्लोक
बृहदारण्यकोपनिषद (टीका सहित)
बृहदारण्यकोपनिषद्, काण्व रेचेन्सिओन् wइथ् थे चोम्मेन्तर्य् अस्च्रिबेद् तो शंकर
अध्याय
अध्याय 1.13अध्याय 1.28अध्याय 1.329अध्याय 1.426अध्याय 1.525अध्याय 1.63अध्याय 2.121अध्याय 2.28अध्याय 2.36अध्याय 2.416अध्याय 2.519अध्याय 2.63अध्याय 3.110अध्याय 3.213अध्याय 3.34अध्याय 3.42अध्याय 3.51अध्याय 3.63अध्याय 3.723अध्याय 3.812अध्याय 3.927अध्याय 4.18अध्याय 4.24अध्याय 4.342अध्याय 4.428अध्याय 4.515अध्याय 4.64अध्याय 5.11अध्याय 5.24अध्याय 5.31अध्याय 5.41अध्याय 5.54अध्याय 5.61अध्याय 5.71अध्याय 5.81अध्याय 5.91अध्याय 5.101अध्याय 5.111अध्याय 5.121अध्याय 5.134अध्याय 5.148अध्याय 5.151अध्याय 6.114अध्याय 6.216अध्याय 6.313अध्याय 6.428अध्याय 6.54
मूल पाठ: Bṛhadāraṇyakopaniṣad, Kāṇva recension with the commentary ascribed to Śaṃkara · Data entry members of the Sansknet Project · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0