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ग्रंथ पाठ

हरिनामचिन्तामणि · अध्याय 3

3.1

इति श्री-हरि-नाम-चिन्तामणौ
नाम-ग्रहण-विचारो नाम प्रथमः परिच्छेदः ।
(3)
तृतीय परिच्छेद
नामाभास विचार
गदाइ गौराङ्ग जय जाह्नवा जीवन ।
सीताद्वैत जय श्रीवासादि भक्त-जन

3.2

हरिदासे महाप्रभु सदय हैया ।
उठाय तखन पद्म-हस्त प्रसारिया

3.3

बले शुन हरिदास आमार वचन ।
नामाभास स्पष्ट-रूपे बुझाओ एखन

3.4

नामाभास बुझाइले नाम शुद्ध हबे ।
अनायासे जीव नाम-गुणे तरे याबे

3.5

नामाभास-मेघ कुज्झटिका-रूप अज्ञान ओ अनर्थ
नाम सूर्य-सम नाशे माया अन्धकार ।
मेघ कुज्झटिका नामे ढाके बार बार

3.6

जीवेर अज्ञान आर अनर्थ सकल ।
कुज्झटिका-मेघ-रूपे हय त प्रबल

3.7

कृष्ण-नाम सूर्य चित्त-गगणे उठिल ।
कुज्झटिका-मेघ पुनः ताहारे ढाकिल

3.8

अज्ञान कुज्झटिका स्वरूप भ्रम
नामेर ये चित् स्वरूप ताहा नाहि जाने ।
से अज्ञान कुज्झटिका अन्धकार आने

3.9

कृष्ण सर्वेश्वर बलि नाहि जाने येइ ।
नाना देवे पूजि कर्म-मार्गे भ्रमे सेइ

3.10

जीवे चित् स्वरूप बलि नाहि यार ज्ञान ।
माया जडाश्रये तार सतत अज्ञान

3.11

तबे हरिदास बले आज आमि धन्य ।
मम मुखे नाम कथा शुनिबे चैतन्य

3.12

कृष्ण जीव प्रभु दास जडात्मिका माया ।
ये ना जाने तार शिरे अज्ञानेर छाया

3.13

मेघ अनर्थ-असत्-तृष्णा, हृदय-दौर्बल्य, अपराध
असत्-तृष्णा, हृदय-दौर्बल्य, अपराध ।
अनर्थ ए सब मेघ-रूपे करे बाध

3.14

नाम-सूर्य रश्मि ढाके नामाभास हय ।
स्वतः सिद्ध कृष्ण-नामे सदा आच्छादय

3.15

नामाभासेर अवधि
सम्बन्ध-तत्त्वेर ज्ञान यावत् ना हय ।
तावत् से नामाभास जीवेर आश्रय

3.16

साधक यद्यपि पाय सद्-गुरु आश्रय ।
भजन-नैपुण्ये मेघ आदि दूर हय

3.17

सम्बन्ध, अभिधेय, प्रयोजन
मेघ कुज्झटिका गेले नाम-दिवाकर ।
प्रकाश हैया भक्ते देन प्रेम-वर

3.18

सद्-गुरु सम्बन्ध ज्ञान करिया अर्पण ।
अभिधेय रूपे करान नामानुशीलन

3.19

नाम-सूर्य स्वल्प-काले प्रबल हैया ।
अनर्थ-कुज्झटिका देन ताडाइया

3.20

प्रयोजन-तत्त्व तबे देन प्रेम-धन ।
प्राप्त-प्रेम जीव करे नाम-सङ्कीर्तन

3.21

सम्बन्ध-ज्ञान
सद्-गुरु-चरणे जीव श्रद्धा सहकारे ।
प्रथमे सम्बन्ध-ज्ञान पाय सुविचारे

3.22

कृष्ण नित्य प्रभु आर जीव नित्य दास ।
कृष्ण प्रेम नित्य जीव-स्वभाव प्रकाश

3.23

कृष्ण नित्य दास जीव ताहा विस्मरिया ।
मायिक जगते फिरे सुख अन्वेषिया

3.24

मायिक जगत् हय जीव कारागार ।
जीवेर वैमुख्य दोषे दण्ड प्रतिकार

3.25

तबे यदि जीव साधु वैष्णव कृपाय ।
सम्बन्ध ज्ञानेते पुनः कृष्ण-नाम पाय

3.26

तबे पाय प्रेम-धन सर्व-धर्म-सार ।
याहार निकटे सायुज्यादिर धिक्कार

3.27

यावत् सम्बन्ध ज्ञान स्थिर नाहि हय ।
तावत् अनर्थे नामाभासेर आश्रय

3.28

नामाभासेर फल
नामाभास दशाते-ओ अनेक मङ्गल ।
जीवेर अवश्य हय सुकृति प्रबल

3.29

नामाभासे नष्ट हय आछे पाप यत ।
नामाभासे मुक्ति हय कलि हय हत

3.30

नामाभासे नर हय सुपङ्क्ति पावन ।
नामाभासे सर्व-रोग हय निवारण

3.31

सकल आशङ्का नामाभासे दूर हय ।
नामाभासी सर्वारिष्ट हैते शान्ति पाय

3.32

यक्ष रक्ष भूत प्रेत ग्रह समुदय ।
नामाभासे सकल अनर्थ दूरे याय

3.33

नरके पतित लोक सुखे मुक्ति पाय ।
समस्त प्रारब्ध कर्म नामाभासे याय

3.34

सर्व-वेदाधिक सर्व तीर्थ हैते बड ।
नामाभास सर्व-शुभ-कर्म श्रेष्ठतर

3.35

नामाभासेर वैकुण्ठादि-प्रापकत्व
धर्म अर्थ काम मोक्ष चतुर्-वर्ग-दाता ।
सर्व-शक्ति धरे नामाभासे जीव-त्राता

3.36

जगत् आनन्द-कर श्रेष्ठ-पद-प्रद ।
अगतिर एक गति सर्व-श्रेष्ठ-पद

3.37

वैकुण्ठादि लोक प्राप्ति नामाभासे हय ।
विशेषतः कलि-युगे सर्व-शास्त्र कय

3.38

सङ्केत, परिहास, स्तोभ ओ हेला एइ चारि-प्रकार नामाभास
चतुर्विध नामाभास एइ मात्र जानि ।
सङ्केत ओ परिहास, स्तोभ, हेला मानि

3.39

सङ्केत-रूप नामाभासेर प्रकार-द्वय
विष्णु लक्ष्य करि जड बुद्ध्ये नाम लय ।
अन्य लक्ष्य करि विष्णु नाम उच्चारय

3.40

सङ्गेते द्विविध एइ हय नामाभास ।
अजामिल साक्षी तार शास्त्रेते प्रकाश

3.41

यवन सकल मुक्त हबे अनायासे ।
हाराम हाराम बलि कहे नामाभासे

3.42

अन्यत्र सङ्केते यदि हय नामाभास ।
तथापि नामेर तेज ना हय विनाश

3.43

परिहास-नामाभास
परिहासे कृष्ण-नाम येइ जन करे ।
जरासन्ध सम सेइ ए संसारे तरे

3.44

स्तोभ नामाभास
अङ्ग-भङ्गी चैद्य सम करे नामाभास ।
स्तोभ मात्र हय तबु नाशे भव-पाश

3.45

हेला नामाभास
मन नाहि देय आर अवज्ञा भावेते ।
कृष्ण राम बले हेला नामाभास ताते

3.46

एइ सब नामाभासे म्लेच्छ-गण तरे ।
विषयी अलस जन एइ पथ धरे

3.47

श्रद्धा ओ हेला नामाभासेर भेद
श्रद्धा करि करे नाम अनर्थ सहित ।
श्रद्धा नाम हय सेइ तोमार विहित

3.48

सङ्केतादि अवज्ञा पर्यन्त भाव धरि ।
नाम करे हेलाय ये श्रद्धा परिहरि

3.49

नामाभास अवधि से हेला नाम हय ।
ताहाते-ओ मुक्ति लभे पाप हय क्षय

3.50

अनर्थ-नाशे नामाभास नाम हैया प्रेम देय
कृष्ण प्रेम छाडि सब नामाभासे पाय ।
नामाभासे पुनः शुद्ध नाम हये याय

3.51

अनर्थ विगते यबे शुद्ध नाम हय ।
कृष्ण-प्रेम तबे तार ह-इबे निश्चय

3.52

नामाभासे साक्षात् से प्रेम दिते नारे ।
नाम हये प्रेम देय विधि अनुसारे

3.53

नामाभास ओ नामापराधेर भेद
अतएव नाम अपराध परिहरि ।
नामाभास करे येइ तारे नति करि

3.54

कर्म ज्ञान हैते अनन्त श्रेष्ठतर ।
बलि नामाभासे जानि ओहे सर्वेश्वर

3.55

रति मूला श्रद्धा यदि शुद्ध-भावे हय ।
तबे त विशुद्ध नाम ह-इबे उदय

3.56

छाया ओ प्रतिबिम्ब भेदे आभास दुइ प्रकार
छाया नामाभास
आभास द्विविध हय प्रतिबिम्ब छाया ।
श्रद्धाभास द्वि-प्रकार सब तव माया

3.57

छाया श्रद्धाभासे छाया-नामाभास हय ।
सेइ नामाभासे जीवेर शुभ प्रसवय

3.58

प्रतिबिम्ब नामाभास
अन्य जीवे शुद्धा श्रद्धा करिया दर्शन ।
निज मने श्रद्धाभास आने येइ जन

3.59

भोग मोक्ष वाञ्छा ताहे थाके नित्य मिशि ।
अश्रमे अभीष्ट लाभे यते दिवानिशि

3.60

श्रद्धार लक्षण मात्र श्रद्धा ताहे नय ।
ताके प्रतिबिम्ब श्रद्धाभास शास्त्रे कय

3.61

प्रतिबिम्ब श्रद्धाभासे नामाभास यत ।
प्रतिबिम्ब-नामाभास हय अविरत

3.62

प्रतिबिम्ब- नामाभासे मायावाद कपटता उत्पन्न करे
एइ नामाभासे मायावाद दुष्ट-मत ।
प्रवेशिया शठताय हय परिणत

3.63

कपट प्रतिबिम्ब-नामाभास नामापराध
नित्य साध्य नामे साधन बुद्धि करि ।
नामेर महिमा नाशि अपराधे मरि

3.64

छाया नामाभास ओ प्रतिबिम्ब-नामाभासेर भेद
छाया नामाभासे मात्र हयत अज्ञान ।
हृदय-दौर्बल्य हैते अनर्थ विधान

3.65

सेइ सब दोषे नाम करेन मार्जन ।
प्रतिबिम्ब नामाभासे दोषेर वर्धन

3.66

मायावाद ओ भक्ति - इङ्हारा परस्पर विपरीत धर्म
मायावाद-इ अपराध
कृष्ण-नाम रूप गुण लीलादि सकल ।
मायावादि-मते मिथ्या नश्वर सकल

3.67

सेइ मते प्रेम-तत्त्व नित्य नाहि हय ।
भक्ति-विपरीत मायावाद सुनिश्चय

3.68

भक्ति-वैरी मध्ये मायावादेर गणन ।
अतएव मायावादी अपराधी हन

3.69

मायावादि मुखे नाम नाहि बाहिराय ।
नाम बाहिराय तबु नामत्व ना पाय

3.70

मायावादी यदि करे नाम उच्चारण ।
नामके अनित्य बलि लभये पतन

3.71

नामेर निकटे भोग-मोक्षेर प्रार्थना ।
नामेर निकटे शाठ्य फलेते यातना

3.72

मायावादीर अपराध कखन छाडे
तबे यदि मायावादी भुक्ति मुक्ति आश ।
छाडिया करये नाम हये कृष्ण-दास

3.73

तबे तारे छाडे मायावाद दुष्ट-मत ।
अनुताप सह हय नाम अनुगत

3.74

साधु सङ्गे करे पुनः श्रवण कीर्तन ।
सुसम्बन्ध ज्ञान तार उदे तत क्षण

3.75

अविश्रान्त नाम करे पडे चक्षु जल ।
नाम कृपा पाय चित्त हय त सबल

3.76

भक्तिके अनित्य बलिया मायावाद अपराध ह-इयाछे
कृष्ण-रूप कृष्ण-दास्य जीवेर स्वभाव ।
मायावाद अनित्य कल्पित बले सब

3.77

हेन मायावाद नाम अपरादे गणि ।
मायावाद हय सर्व विपदेर खनि

3.78

मायावादी नामाभासे युक्त्य्-आभास-रूपे सायुज्य लाभ करे
नामाभास कल्प-तरु मायावादि-जने ।
अभीष्ट अर्पण करे सायुज्य निर्वाणे

3.79

सर्व-शक्ति नामे आछे ताइ नामाभासे ।
प्रतिबिम्ब ह-इले-ओ देन मुक्त्य्-आभासे

3.80

पञ्च-विध मुक्ति मध्ये सायुज्य आभास ।
भव क्लेश नाशे मात्र फले सर्व-नाश

3.81

मायावादी नित्य-सुख पाय ना
मायाय मोहित जन ताहे सुख माने ।
सुखाभास मात्र पाय सायुज्य निर्वाणे

3.82

सच्-चित्-आनन्द सेवा परम निर्वृति ।
सायुज्य ना पाय कभु हत-कृष्ण-स्मृति

3.83

याङ्हा नाहि भक्ति प्रेम नित्यता विश्वास ।
नित्य सुख कैछे ताहे ह-इबे प्रकाश

3.84

छाया- नामाभासी दुष्ट-मते ना प्रवेश करिले क्रमे शुद्ध नाम पाइया थाकेन
छाया नामाभासी नाहि जाने दुष्ट-मत ।
मतवादे चित्त-बले नहे तार हत

3.85

से केवल नाहि जाने यथार्थ प्रभाव ।
से प्रभाव ज्ञान-दान नामेर स्वभाव

3.86

मेघाच्छन्ने सूर्य-प्रभा प्रतीत ना हय ।
किन्तु मेघे नाशि सूर्य करेन उदय

3.87

छाया- नामाभासी धन्य सद्-गुरु प्रभावे ।
अल्प-दिने नाम प्रेम अनायासे पाबे

3.88

भक्तेर मायावादीर सङ्ग अवश्य परित्याज्य
मायावादी सङ्ग तेङ्ह सतर्के छाडिया ।
शुद्ध नाम परायण तुषिबे सेविया

3.89

एइ त तोमार आज्ञा श्री-कृष्ण-चैतन्य ।
सेइ आज्ञा येइ पाले सेइ जीव धन्य

3.90

ये ना पाले तव आज्ञा सेइ जीव छार ।
कोटी जन्मे किछुते-इ ना हबे उद्धार

3.91

कुसङ्ग छाडिये प्रभु राख तव पाय ।
तव पादपद्म विना ना देखि उपाय

3.92

हरिदास पद-द्वन्द्वे विनोद याहार ।
हरि-नाम-चिन्तामणि सदा गान तार

मूल पाठ: Harināmacintāmaṇi · Data entry n.n. · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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