हरिनामचिन्तामणि · अध्याय 2
इति श्री-हरि-नाम-चिन्तामणौ नाम-माहात्म-सूचनं नाम प्रथमः परिच्छेदः ।
(2)
द्वितीय परिच्छेद
नाम-ग्रहण-विचार
गदाइ गौराङ्ग जय जाह्नवा जीवन ।
सीताद्वैत जय श्रीवासादि भक्त गण
महा-प्रेमे हरि-दास करेन रोदन ।
प्रेमे तारे गौरचन्द्र दिला आलिङ्गन
बलेन तोमार सम भक्त कोथा आर ।
सर्व-तत्त्व-ज्ञाता तुमि सदा माया-पार
अनन्य भजनेर श्रेष्ठता
निच-कुले अवतरि देखाले सकले ।
धने माने कुले शीले कृष्ण नाहि मिले
अनन्य भजने याङ्र श्रद्धा अतिशय ।
देवता अपेक्षा श्रेष्ठ सेइ महाशय
श्री-हरि-दासेर नामाचार्य्यता
नाम-तत्त्व सर्व-सार तोमार विदित ।
आचारे आचार्य्य तुमि प्रचारे पण्डित
बल हरिदास नाम-महिमा अपार ।
शुनिया तोमार मुखे आनन्द आमार
वैष्णव-लक्षण
एक नाम यार मुखे वैष्णव से हय ।
तारे गृही यत्न करि मानिबे निश्चय
वैष्णवतर-लक्षण
निरन्तर यार मुखे शुनि कृष्ण-नाम ।
सेइ से वैष्णवतर सर्व-गुण-धाम
वैष्णवतम-लक्षण
वैष्णव उत्तम सेइ याहारे देखिले ।
कृष्ण-नाम आसे मुखे कृष्ण-भक्ति मिले
हेन कृष्ण-नाम जीव कि रूपे करिबे ।
ताहार विधान तुमि आमारे बलिबे
कर युडि हरिदास बलेन वचन ।
प्रेम गद-गद स्वर सजल नयन
नामेर स्वरूप
कृष्ण-नाम चिन्तामणि अनादि चिन्मय ।
येइ कृष्ण सेइ नाम एक-तत्त्व हय
चैतन्य विग्रह नाम नित्य मुक्त तत्त्व ।
नाम नामी भिन्न नय नित्य शुद्ध सत्त्व
ए जड जगते ताङ्र अक्षर आकार ।
रस-रूपे रसिकेते सत्त्व अवतार
कृष्ण वस्तु हय चारि धर्मे परिचित ।
नाम रूप गुण कर्म अनादि विहित
नाम नित्य-सिद्ध
नित्य वस्तु रस-रूप कृष्ण से अद्वय ।
सेइ चारि परिचये वस्तु सिद्ध हय
सन्धिनी शक्तिते ताङ्र चारि परिचय ।
नित्य-सिद्ध रूपे ख्यात सर्वदा चिन्मय
कृष्ण आकर्षये सर्व विश्व-गत जन ।
सेइ नित्य धर्म गत कृष्ण नाम धन
कृष्ण-रूप नित्य
कृष्ण-रूप कृष्ण हैते सर्वदा अभेद ।
नाम रूप एक वस्तु नाहिक प्रभेद
श्री-नाम स्मरिले रूप आइसे सङ्गे सङ्गे ।
रूप नाम भिन्न नय नाचे नाना रङ्गे
कृष्ण-गुण नित्य
कृष्ण-गुण चतुः-षष्ठि अनन्त अपार ।
याङ्र निज अंश-रूपे सब अवतार
याङ्र गुण अंशे ब्रह्मा शिवादि ईश्वर ।
याङ्र गुणे नारायण षष्ठि गुणेश्वर
सेइ सब नित्य-गुणे नित्य नाम ताङ्र ।
अनन्त सङ्ख्याय व्याप्त वैकुण्ठ व्यापार
कृष्ण-लीलार नित्यत्व
सेइ गुण तरङ्गेते लीलार विस्तार ।
गोलोके वैकुण्ठ व्रज सब चिद्-आकारे
चिद्-वस्तुते नाम, रूप, गुण, लीला वस्तु हैते पृथक् नय
नाम रूप गुण लीला अभिन्न उदय ।
अचित् सम्पर्के बद्ध जीवे भिन्न हय
शुद्ध जीवे नाम रूप गुण क्रिया एक ।
जडाश्रित देहे भेद एइ से विवेक
कृष्णे नाहि जड-गन्ध अतएव ताङ्य ।
नाम रूप गुण लीला एक-तत्त्व भाय
नामेर सर्व-मूलत्व
एइ चारि परिचय मध्ये नाम ताङ्र ।
सकलेर आदि से प्रतीति सबाकार
अतएव नाम मात्र वैष्णवेर धर्म ।
नामे प्रस्फुटित हय रूप गुण कर्म
कृष्णेर समग्र लीला नामे विद्यमान ।
नामे से परम तत्त्व तोमार विधान
वैष्णव ओ वैष्णव-प्राये भेद आछे
सेइ नाम बद्ध जीव श्रद्धा सहकारे ।
शुद्ध रूपे लैले वैष्णव बलि तारे
नामाभास यार हय से वैष्णव-प्राय ।
कृष्ण-कृपा बले क्रमे शुद्ध भाव पाय
एइ मायिक जगते कृष्ण-नाम ओ जीव एइ दुइटि मात्र चिद्-व्यापार
नाम सम वस्तु नाइ ए भव संसारे ।
नामे से परम धन कृष्णेर भाण्डारे
जीव निजे चिद्-व्यापारे कृष्ण-नाम आर ।
आर सब प्रापञ्चिक जगत् संसार
मुख्य गौण भेदे नाम दुइ प्रकार
मुख्य ओ गौण भेदे कृष्ण-नाम द्वि-प्रकार ।
मुख्य-नामाश्रये जीव पाय सर्व सार
चिल्-लीला आश्रय करि यत कृष्ण नाम ।
सेइ सेइ मुख्य नाम सर्व गुण धाम
मुख्य नाम
गोविन्द गोपाल राम श्री-नन्द-नन्दन ।
राधानाथ हरि यशोमती प्राण-धन
मदन-मोहन श्यामसुन्दर माधव ।
गोपीनाथ व्रज-गोप राखाल यादव
एइ रूप नित्य लीला प्रकाशक नाम ।
ए सब कीर्तने जीव पाय कृष्ण धाम
गौण नाम ओ ताहार लक्षण
जडा प्रकृतिर परिचये नाम यत ।
प्रकृतिर गुणे गौण वेदेर सम्मत
सृष्टि-कर्ता परमात्मा ब्रह्म स्थिति-कर ।
जगत्-संहर्ता पाता - यज्ञेश्वर हर
मुख्य ओ गौण नामेर फल-भेद
एइ-रूप नाम कर्म-ज्ञान-काण्ड-गत ।
पुण्य मोक्ष दान करे शास्त्रेर सम्मत
नामेर ये मुख्य फल कृष्ण प्रेम धन ।
तार मुख्य नामे मात्र लभे साधु गण
नाम ओ नामाभास-मात्र फल-भेद
एक कृष्ण-नाम यदि मुखे बाहिराय ।
अथवा श्रवण-पथे अन्तरेते याय
शुद्ध वर्ण हय वा अशुद्ध वर्ण हय ।
ताते जीव तरे एइ शास्त्रेर निर्णय
किन्तु एक कथा इथे आछे सुनिश्चित ।
नामाभास हैले विलम्बे हय हित
नामाभास हैले-ओ अन्य शुभ हय ।
प्रेम-धन केवल विलम्बे उपजय
नामाभासे पाप-क्षये शुद्ध नाम हय ।
तखन-इ श्री-कृष्ण-प्रेम लभये निश्चय
व्यवहित वा व्यवधाने दोषे जन्मे
किन्तु व्यवहित हले हय अपराध ।
सेइ अपराधे हय प्रेम-लाभ बाध
नाम-नामी भेद-बुद्धि व्यवधान हय ।
व्यवहित थाकिले कदापि प्रेम नय
व्यवधान दुइ प्रकार
वर्ण-व्यवधान आर तत्त्व-व्यवधान ।
व्यवधान द्वि-प्रकार वेदेर विधान
मायावाद-इ नामे तत्त्व-व्यवधान करे
तत्त्व-व्यवधान मायावाद दुष्ट मत ।
कलिर जञ्जाल एइ शास्त्र असम्मत
व्यवधानाबिद्ध नाम-इ शुद्ध नाम
अतएव शुद्ध कृष्ण नाम याङ्र मुखे ।
ताङ्हाके वैष्णव जानि सदा सेवि सुखे
अनर्थ यत नष्ट हय तत-इ नामाभासत्व दूर हय ओ चिन्मय नाम प्रकाश पाय
नामाभास भेदि शुद्ध-नाम लभिबारे ।
सद्-गुरु सेविबे जीव यत्न सहकारे
भजने अनर्थ नाश येइ क्षणे पाय ।
चित्-स्वरूप नामे नाचे भक्तेर जीह्वाय
नाम से अमृत धारा नाहि छाडे आर ।
नाम रसे मत्त जीव नाचे अनिवार
नाम नाचे जीव नाचे नाचे प्रेम धन ।
जगत् नाचाय माया करे पलायन
याहार नामे श्रद्धा हय ताहार-इ नामे अधिकार हैया थाके नामे सर्व-शक्ति आछे
नामे अधिकार नर-मात्रे कैले दान ।
सर्व-शक्ति नामे प्रभु करिले विधान
यार श्रद्धा हय नामे सेइ अधिकारी ।
यार मुखे कृष्ण-नाम सेइ से आचारी
देश-काल अशौचादिर बाधा नामे नाइ
देश काल अशौचादि नियम सकाल ।
श्री-नाम-ग्रहणे नाइ नाम से प्रबल
कलि-जीवेर नामे निष्कपट विश्वास हैले-इ नामे अधिकार हैल
दाने यज्ञे स्नाने जपे आछे त विचार ।
कृष्ण-सङ्कीर्तने मात्र श्रद्धा अधिकार
युग-धर्म हरि-नाम अनन्य श्रद्धाय ।
ये करे आश्रय तार सर्व-लाभ हय
कलि जीव निष्कपटे कृष्णेर संसारे ।
अवस्थित हये कृष्ण-नाम सदा करे
नामेर अनुकूल विषय ग्रहण ओ प्रतिकूल विसय वर्जन
भजनेर अनुकूल सर्व कार्य्य करिऽ ।
भजनेर प्रतिकूल सब परिहरिऽ
कृष्णेर संसारे थाकिऽ काटाये जीवन ।
निरन्तर हरि-नाम करेन स्मरण
अनन्य बुद्धिते नाम ग्रहण करिबे
आर कोन धर्म कर्म कभु ना करिबे ।
स्वतन्त्र ईश्वर-ज्ञाने अन्ये ना पूजिबे
कृष्ण-नाम भक्त-सेवा सतत करिबे ।
कृष्ण-प्रेम लाभ तार अवश्य ह-इबे
हरिदास काङ्दि प्रभु चरणे पडिया ।
नामे अनुराग मागे चरण धरिया
हरिदास पदे भक्तिविनोद याहार ।
हरिनाम चिन्तामणि जीवन ताहार
मूल पाठ: Harināmacintāmaṇi · Data entry n.n. · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0