वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 8.1.62
या पद्मासना पद्म-हस्ता हंस-निर्याख्य-वाहिनी नित्यम् र्̥षिभिश् चानुगामिनी ताम् अजां पुण्डरीक-नेत्रीं भगवतीं श्रीम्
óं श्र्íयम् आवाहयामि
ध्ŕ̥तिम् आवाहयामि
पव्íत्रीम् आवाहयामि
प्रम्óदाय्íनीम् आवाहयामि
मेद्íनी देवी वस्úन्धरी स्याद् व्áसुधा देवी वास्áवी
ब्रह्म-वर्चस्áः पित्र्̥णा(ग्)ं श्र्óत्रं व्íष्णुर् म्áनः
8.1.62.7[*814] आयातु भगवती हरिणी श्याम-वर्णा स-गणा स-सैन्या श्री परम-पुरुष-सहाया सह देवताभिर् अनुमन्यताम्
या नीलोत्पलासना नीलोत्पल-हस्ता महा-चातक-वाहिनी नित्यम् र्̥षिभिश् चानुगामिनी ताम् अजां नीलोत्पल-नेत्रीम् भगवतीं[*815] लम्
óं ह्áर्íणीम् आवाहयामि
[*814] थेरे अरे नो अच्चेन्त् मर्क्स् इन् थे तेxत् fरोम् 8.1.62.8 थ्रोउघ् 8.1.62.9.
[*815] तेxत्: भगवती
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0