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ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 8.1.61

8.1.61.1

इद्áं व्íष्णुः

8.1.61.2

आयात्ú भ्áग्áवान्

8.1.61.3

óं व्íष्णुम् आवाहयामि

8.1.61.4

प्úर्úषम् आवाहयामि

8.1.61.5

स्áत्यम् आवाहयामि

8.1.61.6

áच्य्úतम् आवाहयामि

8.1.61.7

áन्íर्úद्धम् आवाहयामि

8.1.61.8

श्रिय्é जात्áश् श्रिय्á आ न्íर् इयाय श्र्íयं व्áयो जरित्ŕ̥भ्यो दधाति
श्र्íयं व्áसाना अम्र्̥तत्व्áम् आयन् भ्áवन्ति सत्या समिधा मित्áद्रौ
8.1.61.9[*813] आयातु भगवती श्रीस् स्वर्ण-वर्णा स-गणा स-सैन्य श्री परम-पुरुष-सहाया सह देवताभिर् अनुमन्यताम्
[*813] थेरे अरे नो अच्चेन्त् मर्क्स् इन् थे तेxत् fरोम् 8.1.61.9 थ्रोउघ् 8.1.62.1.

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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