ग्रंथ पाठ
वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 8.1.63
8.1.63.1
पúष्णीम् आवाहयामि
8.1.63.2
क्ष्óनीम् आवाहयामि
8.1.63.3
म्áहीम् आवाहयामि
8.1.63.4
ओं म्áह्यै न्áमः
8.1.63.5
स्áर्वाधाराय न्áमः
8.1.63.6
स्áनातनाय न्áमः
8.1.63.7
दिव्याय न्áमः
8.1.63.8
कम्áठ-रूपिणे [*816]न्áमः
8.1.63.9
आदि-कूर्माय न्áमः
8.1.63.10
श्éषाय न्áमः
8.1.63.11
द्íग्-गजेभ्यो न्áमः
8.1.63.12
आधार-शक्त्यै न्áमः
8.1.63.13
सप्तार्णवेभ्यो न्áमः
8.1.63.14
स्áह्áस्र्á-प्áत्र्á-य्úत्á-क्áमलाय न्áमः
8.1.63.15
र्áक्ताम्ब्úज्á-म्áण्í-य्áम्á-प्áद्म-पीठाय न्áमः
8.1.63.16
श्रीम्áन्-नारायणाय न्áमः
[*816] थे तेxत्स् इन्सेर्त्स् थे wओर्द् य हेरे wहिछ् wए हवे ओमित्तेद्.
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0