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ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.18

7.1.18.1

[9.6] माम् आत्म-गुप्तां व्áहसि स्म भूत्यै[*669] तां राजिमतीं[*670] धुर्áं[*671] धूरयन्तीम्[*672]
धूर् असि ध्रुवाय स्वाहा

7.1.18.2

[9.7] य्áं चिन्तयन्त्ó निग्áमान्त-रूप्áं य्áं विष्णु[*673]-रूप्áं पर्áमात्म-पुण्य्áम्
त्é विन्दमानाः[*674] स्áकलं व्रज्áन्ति[*675] त्áन् देव[*676]-मुख्य्áं सु-र्áतं भवाय स्वाहा

7.1.18.3

[9.8] पुण्य्áञ्[*677] च प्úण्या[*678] फ्úरुषे[*679] पुर्-áग्रां[*680] तां राजिमत्áं[*681] न्íधि[*682]-चोदितां नः[*683]
व्íदधाति[*684] प्úष्टिं[*685] परां[*686] पराय स्वाहा

7.1.18.4

[9.9] स्ó[*687] नो भूत्ó य्ó वाम्र्̥तात्मा सु-पुष्ट्íम् áस्मद् व्íतरन्[*688] पव्íत्राम्[*689]
स्ó[*690] नो ऽस्तु भूत्यै क्áमला-वराय[*691] स्वाहा

7.1.18.5

[9.10] स त्व्[*692] एव्á नित्य्áं स्áकलास् स्व-मूर्त्áयस्[*693] स्ú-रतास् व्[*694] अन्áन्ताः
त्é ऽजीजयन्तो व्íपद् अक्षयाणाम्[*695] त्áत्-तत्-सवित्र्é हरते हराय[*696] स्वाहा
[*669] उस् वहसे स्व-भूत्यै रेप्लचेस् व्áहसि स्म भूत्यै
[*670] उस् राजिमन्ताम्
[*671] उस् धूर्
[*672] तेxत्: थूरयन्तीम्
[*673] उस् विश्व
[*674] तेxत्: विन्दमानां; ब्ब्: विन्दमानाः
[*675] उस् व्रजन्तीं; ब्ब् व्रज्áन्ति; तेxत्: व्रज्áन्ती
[*676] उस् दैव
[*677] उस् पुण्यां
[*678] उस् पुण्यः
[*679] फ्úरुषे रेअद् अस् प्úरुषे. उस् पुरुषे
[*680] उस् पुर्-अग्रे
[*681] इन् राजिमत्áं, थे अ हस् अ दोउब्ले अनुदात्त उन्देर्नेअथ् इत् इन् थे तेxत्. उस् राजिमन्तां. च्f. एन्ग्लिस्ह् तेxत्
[*682] उस् निशि
[*683] उस् चोदितानाम्
[*684] उस् निदधाति
[*685] उस् पुष्ट्यै
[*686] उस् हरन्
[*687] उस् स
[*688] उस् अस्मत्-पितरं रेप्लचेस् áस्मद् व्íतरन्
[*689] उस् पवित्रं
[*690] उस् स
[*691] उस् कमलं पराय रेप्लचेस् क्áमला वराय
[*692] उस् ओमित्स्
[*693] तेxत्: प्व-मूर्त्áयस् चोर्रेच्तेद् तो स्व-मूर्त्áयस्. उस् स-मूर्तयः
[*694] उस् त्व्
[*695] उस् वियति क्षयाणां रेप्लचेस् व्íपद् अक्षयाणाम्
[*696] उस् पराय

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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