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ENहिગુ
ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.17

7.1.17.1

[9.1] चत्वारो द्óषाः[*657] प्र्áहरन्ति य्áस्य स्áर्वस्य गोप्त्र्é स्ú-रसाय धाम्ने
स्óमस्य पुण्य्áं र्áयिमत्-प्रव्र्̥द्ध्यै स्वाहा

7.1.17.2

[9.2] व्áक्षो वसत्य् áस्य व्áरां वरिष्ठां[*658] वाकन् दधाना व्áव्र्̥धे सम्áस्तम्
त्áस्मí वरिष्ठाय व्áर-प्रव्र्̥द्ध्यै स्वाहा

7.1.17.3

[9.3] अण्óर् áणीयान् महत्ó म्áहीयान् आत्मा ग्úहायां न्íहितो ऽस्य जन्त्óः
त्áम् अक्रत्úं प्áश्यति वीत-शोक्ó धात्úः प्र्áसादान् महिमानम् ईश[ग्ग्]ं स्वाहा

7.1.17.4

[9.4] व्íष्णुर् व्áरिष्ठो वर-दान-मुख्य्ó य्ó ऽविश्व-भीषी[*659] ध्यायन्न् अकुर्व्áन्
विश्व्áं विभीष्áं[*660] व्य्áदधत् तम् म्áन्त्रं[*661] त्áद्[*662] व्íष्ण्áवे यत्[*663] प्रभव्íष्णवे यम्[*664] अम्íतं भरित्रे स्वाहा

7.1.17.5

[9.5] áजो[*665] जुषन्त्áः प्र्áपतन् पद्áतः[*666] पूं पूं पुषन्त्áः प्úनर् यः[*667] प्रवाकम्[*668]
क्áं कं जनित्र्é स्áम-तेजसन् ते स्वाहा
[*657] उस् दोषः
[*658] उस् वरा वरिष्ठं रेप्लचेस् व्áरां वरिष्ठां
[*659] तेxत्: ऽविश्व-भीष्í; उस् विश्वर्षीन् रेप्लचेस् ऽविश्व-भीषी
[*660] उस् हीषद्
[*661] तेxत्: áन्त्रत्
[*662] उस् ओमित्स् व्य्áदधत् तम् áन्त्रत् त्áद्
[*663] उस् याः
[*664] उस् ता
[*665] उस् अब्जो
[*666] उस् प्रपतत् पतन्तः रेप्लचेस् प्र्áपतन् पद्áतः
[*667] उस् पुनयः रेप्लचेस् पुनर् यः
[*668] उस् प्रवाळः

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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