वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.19
[10.1] या गा[*698] व्áर्íष्ठास् स्áहसूर् धरित्र्é[*699] व्áसन् वसन्[*700] वí व्áसुनीह भद्राः[*701]
र्éरीहयन्तो[*702] र्áजत्áं रेजन्ते[*703] स्वाहा
[10.2] वाय्áव्[*704] अन्तरात्मा व्áहते[*705] सम्áस्तं[*706] स्ú-पुण्य-देव्éति स सूरि-मुक्त्áः
सूर्íस् सुराणां स्úरसो ऽप्य् अस्úन्-दस् स्áमूह्य देवाय[*707] व्áर-दाय पित्रे स्वाहा
[10.3] स्áर्वोप्áरिष्टाद्[*708] áधितिष्ठत्[*709] आत्मा त्áस्योपरिष्टात्[*710] प्áरमस्[*711] स-म्úक्तः[*712]
त्áन् नीरजन्तं[*713] स्úतनु व्रज्áन्तम्[*714] áनुस्áंपराय स्वाहा
[10.4] त्áमस् स्áर्व-भूतम् áधुनोद् वरेण्य्áस्[*715] त्व्áं[*716] सत्व-रूप्áं[*717] स्áकलं[*718] प्रकाश्य[*719]
स्áङ्क्लेशयन् स्र्̥ष्टि-न्íमित्तये[*720] य्áस्[*721] त्áस्मै प्áर-ब्र्áह्मणे प्áरं-ज्य्óतिषे स्वाहा
[10.5] ज्य्óतिर् ज्य्óतिर् ज्य्óतिषां ज्य्óतिर्[*722] óजो वा[*723] ब्áलम् आहरन्[*724]
सत्व्áं[*725] सत्वात्मकं स्á-ज्योतिर्[*726] उक्त्áं[*727] त्áस्मै सूक्ष्म-सूक्ष्माय त्éजसे स्वाहा
[*698] उस् गौर्
[*699] उस् सहसोर् धरित्री रेप्लचेस् स्áहसूर् धरित्र्é
[*700] उस् वसुं वसुं रेप्लचेस् व्áसन् वसन्
[*701] उस् भद्रा
[*702] उस् रेरीजयन्तो
[*703] उस् रजतं
[*704] उस् वायोर्
[*705] उस् वहति
[*706] उस् समस्तः
[*707] उस् देवा
[*708] उस् यस्योपरिष्टद्
[*709] उस् अधितिष्ठद्
[*710] उस् सर्वोपरिष्टात्
[*711] उस् परमात्मा
[*712] उस् मुक्तं
[*713] उस् विरजं नित्यम् रेप्लचेस् नीरजन्तं
[*714] उस् ओमित्स् स्úतनु व्रज्áन्तम्
[*715] उस् अधुनाध्वरेण रेप्लचेस् áधुनोद् वरेण्य्áस्
[*716] उस् तं
[*717] उस् सत्त्व-रूपं
[*718] उस् ओमित्स्
[*719] उस् अनुप्रविश्य
[*720] उस् -निमित्ताय
[*721] उस् ओमित्स्
[*722] उस् जेनातिर् जेनातिषां जेनातिर् रेप्लचेस् ज्य्óतिर् ज्य्óतिर् ज्य्óतिषां ज्य्óतिर्
[*723] उस् ओमित्स्
[*724] उस् आहरत्
[*725] उस् ओमित्स्
[*726] उस् सं जेनातिर् रेप्लचेस् स्á-ज्योतिर्
[*727] उस् इत्थं
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0