वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.16
[8.6] भूर् भुवं व्á भुवो वा सुवर्[*640] वा क्íञ्चित् स्वन्áन्तं स्úषुवे सम्áस्तम्
स्áर्वस्य दातारम् अज्áरं जनित्रे स्वाहा
[8.7] दाक्षायण्यां प्र्áस्र्̥तं सम्áस्तं स्áंकोचयित्वा स्áकलं वितानम्
स्áंवासयन् मे[*641] स्áकलं वर्íष्ठं[*642] त्áस्मै प्रजेशाय धुर्áं-धराय स्वाहा
[8.8] आशास् सम्áस्ताः प्र्áतरन् नुवन्त्áस्[*643] तास् वाव नद्यां[*644] क्áमला सम्áस्ता
ताम्[*645] मे ग्रहे वा स्áमधत्त पुष्टि[ग्ग्]ं स्वाहा
[8.9] य्ó जंगमानां स्áकलं बिभ्áर्ति[*646] स्áर्वं वियद् वा[*647] व्íचरेत[*648] श्áक्ष्य्áन्
त्áन् नः[*649] कुले[*650] वाव पुष्णन्[*651] त्व्[*652] अज्áस्र[ग्ग्]ं स्वाहा
[8.10] य्ó वा दशानां प्र्áह्र्̥तास्[*653] सम्áस्तास् तांस् तान् दधान्áस्[*654] स्áमयात् सुबीजान्[*655]
श्áब्दातिरिक्त्áस्[*656] स्व्á-बलम् बलाय स्वाहा
[*640] उस् सुवो
[*641] उस् यः
[*642] उस् वरिष्ठं; तेxत्: वरिष्ठ
[*643] उस् प्रतरन्न् अनु तम् अन्तस् रेप्लचेस् प्र्áतरन् नुवन्त्áस्
[*644] उस् ता वसेद् द्यौः रेप्लचेस् तास् वाव नद्याम्
[*645] उस् सा
[*646] उस् बिभर्षि
[*647] उस् ओमित्स्
[*648] उस् विचरते
[*649] उस् नौ
[*650] उस् कूले
[*651] उस् वान्तिके रेप्लचेस् वाव पुष्णन्
[*652] उस् ओमित्स्
[*653] उस् प्रस्र्̥ताः
[*654] उस् दधानास्
[*655] उस् सुबीजाः
[*656] उस् शब्दातिरीत्यै
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0