वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.15
[8.1] य्áत् सार-भूत्áं स्áकलं धर्íत्रं[*630] म्óद-प्रायेणानुभूतम् áनुविद्धम्
सूक्ष्म्áस् सुरेश्áस् स्áकलं बिभ्áर्ति[*631] त्áस्मै सुरेशाय सक्áलं सुपुण्य[ग्ग्]ं स्वाहा
[8.2] फ्áलो वा एष्á लोकानाम् áजरो महात्मा विश्व्áम् य्áः पाति व्íमलो ऽमलाख्यः
त्áस्मै ककुत्र्é व्áरदाय[*632] प्úष्ट्यै स्वाहा
[8.3] धूर् नो वहन्त्áं र्áतये रमन्त्áं[*633] भू-भूतिम्[*634] अन्त्áस् स्áमयं सुष्úम्नम्[*635]
áं राजिमन्त्áं स्áकलस्य ग्úप्त्यै स्वाहा
[8.4] व्íश्वं बिभ्áर्ति प्र्áसुरो रुदन्त्áं[*636]
स्áंराजिमन्त्áं[*637] स्áकलं प्ररूढ्áम्
स्á नो वितत्य प्र्áहिणोतु पत्रे स्वाहा
[8.5] स्ó वा स्व-रूपस् स्áम-द्र्̥क् सम्áग्रो व्íधुनन् तु ध्áन्यो[*638] व्íदधत् पद्áं वा
व्íयति प्रकाश्áं ब्ŕ̥हते ऽर्हे त्áं[*639] बिंबवन्त्áं सम्á-दं समग्र[ग्ग्]ं स्वाहा
[*630] उस् धरित्रीं
[*631] अच्चेन्तुअतिओन् इन् थे 1946 एदितिओन्: बिभर्त्í
[*632] उस् वरदस्य
[*633] उस् रमन्ताम्
[*634] उस् प्रभूतिम्
[*635] उस् सुषुम्ना
[*636] उस् अभूद् अन्तं रेप्लचेस् रुदन्त्áं
[*637] उस् संराजवन्तं
[*638] उस् विधुदं तुदन् यो रेप्लचेस् व्íधुनन् तु ध्áन्यो
[*639] उस् गुहेन तं
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0