वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.14
[7.6] दिग्-द्óषा[*611] य्áस्य व्íदिशश् च कर्ण्áउ[*612] द्यúर् आस वक्त्र्áम् úदरन् नभो वा
शास्ति स्म वा य्áस्[*613] स्व्áयम् आप द्áन्तं त्áस्मै वरत्र्é व्áरदाय क्áस्मै स्वाहा
[7.7] पद्मास्य[*614]-व्áक्षाः प्áरमस् सु-पुण्य्áः पद्मा-ज्áनित्र्áं[*615] प्áरम् अस्य वासम्[*616]
सूक्ष्म्áस्[*617] सवित्र्é[*618] स्व्áयम् आदधानस् सावित्र-रूप्áं पर्áमं सु-पुण्य[ग्ग्]ं स्वाहा
[7.8] य्áः पुण्डरीक्áः प्áर्áमान्तरात्मा क्áम्राङ्ग-भूत्áं[*619] क्áमलन् धधार[*620]
सासिष्व्[*621] असन्त्áं स्ú-रसे[*622] रसाय स्वाहा
[7.9] रयीणां प्áतिं य्áजतं ब्र्̥हन्त्áं रा-राग-मुक्त्áं गुर्úं स्व्-अनीक्áम्[*623]
त्áं रायो[*624] रूप्áं र्áयि-भूत्á-भूतिं[*625] रय्íमत्-सुरत्रे[*626] स्वाहा
[7.10] रायां पतत्र्é[*627] रय्íम् आदधात्र्é राय्ó ब्र्̥ह्áन्त्áं र्áयिमत् सु-प्úष्टाम्[*628]
रा-राजिमन्त्áं र्áतये यज्áन्त्ú[*629] त्áं बिंबवन्त्áं क्áकुदाय भ्áद्रे स्वाहा
[*611] उस् दिग्-दोषो
[*612] उस् कर्णौ; तेxत्: कर्ण्á
[*613] उस् सासि वा स्म या रेप्लचेस् शास्ति स्म वा य्áस्
[*614] उस् पद्मास्य; तेxत्: पद्यास्य
[*615] उस् -जनित्री
[*616] उस् वासः
[*617] उस् सूक्ष्मम्
[*618] उस् सावित्रं
[*619] उस् -रूपं
[*620] उस् दधार
[*621] तेxत्: सासीष्व्
[*622] उस् सरसे
[*623] उस् स-श्रीकं
[*624] उस् रायि-
[*625] उस् -भूतं
[*626] उस् -सुरत्रः
[*627] उस् पतत्त्रे
[*628] उस् सु-पुण्यं
[*629] उस् रमन्तं
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0