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ग्रंथ पाठ

सर्वतथागततत्त्वसंग्रह · अध्याय 172

172.1

तत्रासां मुद्रा भवन्ति ।
ओं मणिरत्नपूजाग्र्य

172.2

ओं सर्वार्थसिद्धिवज्ररत्नाभिषेके हूं

172.3

ओं वज्रमणिधारिणिसमये हूं

172.4

ओं मणिरत्नाकर्षे कर्मसमये हूं

172.5

ओं मणिरत्नरागरति कर्मपूजे प्रवर्त

172.6

ओं मणिरत्नसाधुकारपूजासमये

172.7

ओं महामणिरत्नदृष्ट्याकर्षे

172.8

ओं मणिरत्नमालापूजे

172.9

ओं मणिरत्नसूर्यालोकपूजे

172.10

ओं मणिरत्नध्वजपताकापूजे

172.11

॥
ओं मणिरत्नाट्टहासपूजे

172.12

ओं पद्ममणिसमाधिसमये हूं

172.13

ओं सर्वत्यागानुस्मृतिसमाधिकर्मकारि हूं

172.14

ओं मणिरत्नतीक्ष्णसमये च्छिन्द हूं

172.15

ओं मणिरत्नचक्रसमये हूं

172.16

ओं मणिरत्नभाषे वद वद हूं

172.17

ओं मणिरत्नवृष्टिकर्मसमये हूं

172.18

ओं मणिरत्नकर्मणि हूं

172.19

ओं मणिरत्नकवचे रक्ष हूं

172.20

ओं मणिरत्नदंष्ट्री खाद खाद हूं

172.21

ओं मणिरत्नकर्ममुष्टि हूं

172.22

ओं मणिरत्नलास्ये पूजय होः

172.23

ओं मणिरत्नमालाभिषेके पूजय

172.24

ओं मणिरत्नगीते पूजय

172.25

ओं मणिरत्ननृत्ये पूजय

172.26

ओं मणिरत्नधूपे पूजय

172.27

ओं मणिरत्नपुष्पे पूजय

172.28

ओं मणिरत्नदीपे पूजय

172.29

ओं मणिरत्नगन्धे पूजय

172.30

ओं मणिरत्नाङ्कुश्याकर्षे ज्जः

172.31

ओं मणिरत्नपाशे हूं

172.32

ओं मणिरत्नस्फोटे वं

172.33

ओं मणिरत्नावेशे अः

मूल पाठ: Sarvatathāgatatattvasaṃgraha · Edition: Lokesh Chandra: Sarva Tathāgata Tattva Saṅgraha. Delhi : Motilal Banarsidas, 1987. · Data entry Udip Shakya Anula Shakya · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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