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ग्रंथ पाठ

सर्वतथागततत्त्वसंग्रह · अध्याय 125

125.1

इति ॥
तत्रैषां हृदयानि भवन्ति ।
ओं ज्ञानबुद्ध हूं

125.2

ओं ज्ञानविश्वेश्वर हूं

125.3

ओं ज्ञानबुद्धमुकुट हूं

125.4

ओं ज्ञानधर्मेश्वर हूं

125.5

ओं ज्ञानामोघेश्वर हूं

125.6

ओं ज्ञानपद्मबुद्ध हूं

125.7

ओं ज्ञानपद्मराजधर हूं

125.8

ओं ज्ञानपद्ममार हूं

125.9

ओं ज्ञानपद्मतुष्टि हूं

125.10

ओं ज्ञानपद्मभृकुटि हूं

125.11

ओं ज्ञानपद्मसूर्य हूं

125.12

ओं ज्ञानपद्मचन्द्र हूं

125.13

ओं ज्ञानपद्महास हूं

125.14

ओं ज्ञानपद्मतार हूं

125.15

ओं ज्ञानपद्मकुमार हूं

125.16

ओं ज्ञानपद्मनारायण हूं

125.17

ओं ज्ञानपद्मभाष हूं

125.18

ओं ज्ञानपद्मनृत्येश्वर हूं

125.19

ओं ज्ञानपद्मरक्ष हूं

125.20

ओं ज्ञानपद्मयक्ष हूं

125.21

ओं ज्ञानपद्ममुष्टि हूं

125.22

ओं ज्ञानपद्मलास्ये हूं

125.23

ओं ज्ञानपद्ममाले हूं

125.24

ओं ज्ञानपद्मगीते हूं

125.25

ओं ज्ञानपद्मनृत्ये हूं

125.26

ओं पद्मज्ञानधूपे हूं

125.27

ओं पद्मज्ञानपुष्पे हूं

125.28

ओं पद्मज्ञानदीपे हूं

125.29

ओं पद्मज्ञानगन्धे हूं

125.30

ओं पद्मज्ञानाङ्कुश हूं

125.31

ओं पद्मज्ञानामोघपाश हूं

125.32

ओं पद्मज्ञानस्फोट हूं

125.33

ओं पद्मज्ञानावेश हूं

मूल पाठ: Sarvatathāgatatattvasaṃgraha · Edition: Lokesh Chandra: Sarva Tathāgata Tattva Saṅgraha. Delhi : Motilal Banarsidas, 1987. · Data entry Udip Shakya Anula Shakya · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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