नारायणीय · अध्याय 12.325
प्राप्य श्वेतं महाद्वीपं नारदो भगवान् ऋषिः
ददर्श तान् एव नराञ् श्वेतांश् चन्द्रप्रभाञ् शुभान् ॥
पूजयाम् आस शिरसा मनसा तैश् च पूजितः
दिदृक्षुर् जप्यपरमः सर्वकृच्छ्रधरः स्थितः ॥
भूत्वैकाग्रमना विप्र ऊर्ध्वबाहुर् महामुनिः
स्तोत्रं जगौ स विश्वाय निर्गुणाय महात्मने ॥
नमस् ते देवदेव (1)
निष्क्रिय (2)
निर्गुण (3)
लोकसाक्षिन् (4)
क्षेत्रज्ञ (5)
अनन्त (6)
पुरुष (7)
महापुरुष (8)
त्रिगुण (9)
प्रधान (10)
अमृत (11)
व्योम (12)
सनातन (13)
सद-सद्व्यक्ता-व्यक्त (14)
ऋतधामन् (15)
पूर्वादिदेव (16)
वसुप्रद (17)
प्रजापते (18)
सुप्रजापते (19)
वनस्पते (20)
महाप्रजापते (21)
ऊर्जस्पते (22)
वाचस्पते (23)
मनस्पते (24)
जगत्पते (25)
दिवस्पते (26)
मरुत्पते (27)
सलिलपते (28)
पृथिवीपते (29)
दिक्पते (30)
पूर्वनिवास (31)
ब्रह्मपुरोहित (32)
ब्रह्मकायिक (33)
महाकायिक (34)
महाराजिक (35)
चतुर्महाराजिक (36)
आभासुर (37)
महाभासुर (38)
सप्तमहाभासुर (39)
याम्य (40)
महायाम्य (41)
संज्ञासंज्ञ (42)
तुषित (43)
महातुषित (44)
प्रतर्दन (45)
परिनिर्मित (46)
वशवर्तिन् (47)
अपरिनिर्मित (48)
यज्ञ (49)
महायज्ञ (50)
यज्ञसंभव (51)
यज्ञयोने (52)
यज्ञगर्भ (53)
यज्ञहृदय (54)
यज्ञस्तुत (55)
यज्ञभागहर (56)
पञ्चयज्ञधर (57)
पञ्चकालकर्तृगते_2 (58)
पञ्चरात्रिक (59)
वैकुण्ठ (60)
अपराजित (61)
मानसिक (62)
परमस्वामिन् (63)
सुस्नात (64)
हंस (65)
परमहंस (66)
परमयाज्ञिक (67)
सांख्ययोग (68)
अमृतेशय (69)
हिरण्येशय (70)
वेदेशय (71)
कुशेशय (72)
ब्रह्मेशय (73)
पद्मेशय (74)
विश्वेश्वर (75)
त्वं जगदन्वयः (76)
त्वं जगत्प्रकृतिः (77)
तवाग्निर् आस्यम् (78)
वडवामुखो ऽग्निः (79)
त्वम् आहुतिः (80)
त्वं सारथिः (81)
त्वं वषट्कारः (82)
त्वम् ओंकारः (83)
त्वं मनः (84)
त्वं चन्द्रमाः (85)
त्वं चक्षुर् आद्यम् (86)
त्वं सूर्यः (87)
त्वं दिशां गजः (88)
दिग्भानो (89)
हयशिरः (90)
प्रथमत्रिसौपर्ण (91)
पञ्चाग्ने (92)
त्रिणाचिकेत (93)
षडङ्गविधान (94)
प्राग्ज्योतिष (95)
ज्येष्ठसामग (96)
सामिकव्रतधर (97)
अथर्वशिरः (98)
पञ्चमहाकल्प (99)
फेनप_1-आचार्य (100)
वालखिल्य (101)
वैखानस (102)
अभग्नयोग (103)
अभग्नपरिसंख्यान (104)
युगादे (105)
युगमध्य (106)
युगनिधन (107)
आखण्डल (108)
प्राचीनगर्भ (109)
कौशिक (110)
पुरुष्टुत (111)
पुरुहूत (112)
विश्वरूप (113)
अनन्तगते_2 (114)
अनन्तभोग (115)
अनन्त (116)
अनादे (117)
अमध्य (118)
अव्यक्तमध्य (119)
अव्यक्तनिधन (120)
व्रतावास (121)
समुद्राधिवास (122)
यशोवास (123)
तपोवास (124)
लक्ष्म्य्-आवास (125)
विद्यावास (126)
कीर्त्यावास (127)
श्रीवास (128)
सर्वावास (129)
वासुदेव (130)
सर्वच्छन्दक (131)
हरिहय (132)
हरिमेध (133)
महायज्ञभागहर (134)
वरप्रद (135)
यमनियममहानियमकृच्छ्रातिकृच्छ्रमहाकृच्छ्रसर्वकृच्छ्रनियमधर (136)
निवृत्तधर्मप्रवचनगते_2 (137)
प्रवृत्तवेदक्रिय (138)
अज (139)
सर्वगते_2 (140)
सर्वदर्शिन् (141)
अग्राह्य (142)
अचल (143)
महाविधूते (144)
माहात्म्यशरीर (145)
पवित्र (146)
महापवित्र (147)
हिरण्मय (148)
बृहत् (149)
अप्रतर्क्य (150)
अविज्ञेय (151)
ब्रह्माग्र्य (152)
प्रजासर्गकर (153)
प्रजानिधनकर (154)
महामायाधर (155)
चित्रशिखण्डिन् (156)
वरप्रद (157)
पुरोडाशभागहर (158)
गताध्वन् (159)
छिन्नतृष्ण (160)
छिन्नसंशय (161)
सर्वतोनिवृत्त (162)
ब्राह्मणरूप (163)
ब्राह्मणप्रिय (164)
विश्वमूर्ते (165)
महामूर्ते (166)
बान्धव (167)
भक्तवत्सल (168)
ब्रह्मण्यदेव (169)
भक्तो ऽहं त्वां दिदृक्षुः (170)
एकान्तदर्शनाय नमो नमः (171)
मूल पाठ: Nārāyaṇīya (Mahābhārata 12.321-339) · Edition: Reinhold Grünendahl; Angelika Malinar; Thomas Oberlies; Peter Schreiner: Narayaniya-Studien. Herausgegeben von Peter Schreiner. Wiesbaden: Harrassowitz, 1997. (Purana Research Publications Tuebingen 5) · Data entry Peter Schreiner · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0