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ग्रंथ पाठ

हरिनामचिन्तामणि · अध्याय 12

12.1

(12)
द्वादश परिच्छेद
नामापराध प्रमाद
प्रमादः
जय जय महाप्रभु जय भक्त-गण ।
जाङ्देर प्रसादे करि नाम-सङ्कीर्तन

12.2

प्रमाद-नामक अपराध
हरिदास बले प्रभु हेथा सनातने ।
आर त गोपाल भट्ट दक्षिण भ्रमणे

12.3

शिखाइले अप्रमादे श्री-कृष्ण-भजने ।
प्रमादके अपराधे करिले गणन

12.4

अन्य अपराध त्ज्यजि सदा नाम लय ।
तबु नामे प्रेम नाहि हय त उदय

12.5

तबे जानि प्रमाद नामेते अपराध ।
प्रेम भक्ति साधनेते करितेछे बाध

12.6

अनवधानकेइ प्रमाद बले
प्रमाद अनवधान एइ मूल अर्थ ।
इहा हैते घटे प्रभु सकल अनर्थ

12.7

तिन प्रकार अनवधान
औदासीन्य जाड्य आर विक्षेप ए तिन ।
प्रकार अनवधान बुझिबे प्रवीण

12.8

अनुराग ना हओआ पर्यन्त नाम ग्रहणे यत्नेर आवश्यक
कोन भाग्ये कोन जीवेर श्रद्धा यदि हय ।
तबे तिङ्ह हरिनाम ग्रहण करय

12.9

यत्न करि स्मरे नाम सङ्ख्यार सहित ।
तबे नामे अनुराग हय त उदित

12.10

ये पर्यन्त अनुराग ना हय उदय ।
से पर्यन्त यत्न करि नाम सदा लय

12.11

यत्नाभावे साधकेर चित्त स्थिर हय ना
निसर्गतः लोक सब विषये आसक्त ।
स्मृति-काले विषय अन्तरे अनुरक्त

12.12

रुचि याय अन्य स्थाने नामे उदासीन ।
नामे चित्त मग्न नहे जपे प्रतिदिन

12.13

चित्त एक दिके आर अन्य दिके नाम ।
ताहार मङ्गल किसे हय गुण धाम

12.14

लक्ष नाम हैले पूर्ण सङ्ख्या माला गणि ।
हृदये नहिल रस बिन्दु गुण मणि

12.15

एइ त अनवधान दोषेर प्रकार ।
विषयी हृदये प्रभु बड दुर्निवार

12.16

यत्न करिबार विधि
साधु सङ्गे स्वल्प काल छाडिया विषय ।
निर्जने ल-इले नाम एइ दोष क्षय

12.17

क्रमे क्रमे कृष्ण नामे चित्त हय स्थिर ।
निरन्तर नाम रसे हय त अधीर

12.18

तुलसीर सन्निकटे कृष्ण लीला स्थाने ।
साधु सन्निधाने बसिऽ सात्वत-विधाने

12.19

क्रमे काल वृद्धि करि सेइ नाम स्मरे ।
अति शीघ्र विषयेर छन्द ह-इते तरे

12.20

अन्य प्रक्रिया । एइ रूप करिले औदासीन्य रूप अनवधान हय ना
अथवा निर्जने बसिऽ स्मरि साधु-रीति ।
इन्द्रिय पिधान करिऽ नामे करे मति

12.21

सत्वरे नामेते निष्ठा रुचि क्रमे हय ।
औदासीन्य दोषे तार क्रमे हय क्षय

12.22

जाड्य-जनित अनवधान लक्षण
जाड्ये ये अनवधानअ अलसेर मने ।
ताहे रुचि नाहि हय श्री-नाम-ग्रहणे

12.23

स्मृति-काले पुनः शीघ्र विरामे प्रयास ।
एइ दोषे नाम-रस ना हय प्रकाश

12.24

अन्य कार्ये वृथा काल ना हय यापन ।
साधु गण इहा चिन्तिऽ स्मरे अनुक्षण

12.25

नाम स्मरे रसे मजे अन्य नाहि चाय ।
सेइ रूप साधु सङ्गे एइ दोस याय

12.26

अन्वेषिया सेइ रूप साधु-सङ्ग करे ।
तद्-अनुकरणे चित्त जाड्य परिहरे

12.27

अव्यर्थ कालत्व धर्म साधुर चरित ।
देखिले ताहाते रुचि ह-इबे निश्चित

12.28

मने हबे आहा कबे इहार समान ।
स्मरिब गाइब नाम हये भाग्यवान्

12.29

सेइ त उत्साह आसि अलसेर मने ।
जाड्य दूर करे कृष्ण-नामेर स्मरणे

12.30

मने हबे आज लक्ष नाम ये करिब ।
क्रमे क्रमे तिन लक्ष नाम ये स्मरिब

12.31

महाग्रह हबे चित्ते नामेर सङ्ख्याय ।
अचिरे याइबे जाड्य साधुर कृपाय

12.32

विक्षेप जनित अनवधान लक्षण
विक्षेप ह-इते येइ प्रमाद उदय ।
बहु यत्ने सेइ अपराध हय क्षय

12.33

कनक कामिनी आर जय पराजय ।
प्रतिष्ठाशा शाठ्य-वृत्ति ताहार निलय

12.34

ए सब आकृष्टि हृदे ह-इले उदय ।
नामेते अनवधान स्वभावतः हय

12.35

विक्षेप-त्यागेर उपाय
क्रमे क्रमे सेइ सब चिन्ता परिहारे ।
यतिबे सौभाग्यवान् वैष्णव आचारे

12.36

प्रथमेते हरि-दिने भोग-चिन्ता त्यजिऽ ।
साधु सङ्गे रात्र-दिन हरिनाम भजि

12.37

हरि-क्षेत्रे हरि दास हरि शास्त्रे लये ।
उत्सवे मजिबे सुखे परम निर्भये

12.38

क्रमे भक्ति-काल मन करिबे वर्धन ।
हरि-कथा महोत्सवे मजाइया मन

12.39

श्रेष्ठ रस क्रमे चित्ते ह-इबे उदय ।
जडेर निकृष्ट रस छाडिबे निश्चय

12.40

महाजन मुखे हरि-सङ्गीत श्रवणे ।
मुग्ध हबे मनः कर्ण रस आस्वादने

12.41

निकृष्ट विषय-स्पृहा ह-इबे विगत ।
नाम गाने चित्त स्थिर हबे अविरत

12.42

अतएव बहु यत्ने ए प्रमाद त्यजे ।
स्थिर चित्ते नाम रसे चिर दिन मजे

12.43

आग्रह
सङ्कल्पित नाम सङ्ख्या पूर्ण करिबारे ।
ना हय अयत्न नामे देखि बारे बारे

12.44

सतर्क ह-इया करि नाम सङ्कीर्तन ।
प्रमाद छाडिया करि नामेर भजन

12.45

सङ्ख्याधिक स्पृहा एकाग्र-मानसे ।
निरन्तर करिऽ नाम तव कृपा-बले

12.46

एइ कृपा कर प्रभु नामेते प्रमाद ।
ना बाधे आमार चित्ते नाम रसास्वाद

12.47

प्रक्रिया
एकाग्र मानसे निर्जनेते स्वल्प क्षण ।
नाम स्मृति अभ्यास करिबे भक्त जन

12.48

अतएव स्पष्ट नाम भाव लग्न मने ।
सदा हय ए प्रार्थना तोमार चरणे

12.49

आपन यत्नेते केह नाहि पारे ।
तोमार प्रसाद विना ए भव-संसारे

12.50

यत्नाग्रहेर आवश्यकता ।
निष्कपट नाम ग्रहणे ताहा अवश्य थाके, नतुवा अपराध
यत्न करि कृपा मागि व्याकुल अन्तरे ।
तुमि कृपामय कृपा कर अतःपरे

12.51

तव कृपा लाभे यदि ना करि यतन ।
तबे आमि भाग्य हीन हे शचीनन्दन

12.52

हरि-नाम-चिन्तामणि अलङ्कार यार ।
हरि-दास-पद-युग भरसा ताहार

मूल पाठ: Harināmacintāmaṇi · Data entry n.n. · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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