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ग्रंथ पाठ

विष्वक्सेनसंहिता · अध्याय 12.44

12.44.3

निय............................................. ।
ओं आं ओं नमो भगवते परमात्मने विष्णवे वासुदेवाय सर्वात्मने ओं ओम् ।
अं ओं नमो भगवते वासुदेवाय

12.44.4

ओं आं ओं नमो भगवते संकर्षणाय। आं ओम्

12.44.5

ओं नमो भगवते प्रद्युम्नाय

12.44.6

आं ओं ओं नमो भगवते अनिरुद्धाय

12.44.7

अं ओं कैं नमो भगवते वासुदेवाय मत्स्याय मत्स्य---
रूपाय क्रेन्द ओम्

12.44.8

ओं नमो भगवते विष्णवे कूर्मरूपाय वां ओम्

12.44.9

ओं नमो भगवते वराहाय

12.44.10

ओं क्षैं नमो भगवते नारसिंहाय क्षैं ओम्

12.44.11

ओं ईषिनमो भगवते वामनाय धी ओम्

12.44.12

रिं नमो भगवते विष्णवे परशुरामाय रीं ओम्

12.44.13

ओं लूं नामः सकललोकाय श्रीरामाय रावणान्तकाय दशरथात्मजाय सर्वरक्षोघ्नायय सत्यसन्धाय विष्णवे प्रभविष्णवे

12.44.14

ओं ह्रीं नमो भगवते बलीरामाय ह्रीं ओम्

12.44.15

ओं कृतं नमो भगवते विष्णवे वासुदेवाय देवकीपुत्राय कुं ओम्।
त्रायकं ओम्

12.44.16

ओं गैं नमः पुरुषोत्तमा विष्णवे वासुदेवाय कल्की---
विष्णवे नमः ह्रां ओम्

12.44.17

ओं ओं नमो भगवते केशवाय। आं ओम्

12.44.18

ओं नमो भगवते नारायणाय ओम्

12.44.19

ओं नमः पुरुषाय माधवाय विष्णवे वासुदेवाय क्षुं ओम्

12.44.20

आं ओं नमो भगवते गोविन्दाय आं ओम्

12.44.21

नमो भगवते विष्णवे भूं ओम्

12.44.22

आं ओं नमो भगवते मधुसूदनाय आं ओम्

12.44.23

ओं अं नमो भगवते...देवाय इतीद उपरिव्रताय त्रिविक्रमाय अं नम ओम्

12.44.24

ओं अं नमो भगवते विष्णवे वामनाय अं ओम्

12.44.25

ओं अं भगवते विष्णवे वासुदेवाय श्रीधराय अं ओम्

12.44.26

ओं अः ओं नमो भगवते विष्णवे हृषीकेशाय अं ओम्

12.44.27

ओं नमो भगवते विष्णवे पद्मनाभाय पद्महस्ताय ओं आम्

12.44.28

अः ओं नमो भगवते दामोदराय अं ओम्

12.44.29

ओं तत्सत् नमो ब्रह्मणे तत्स ओम्

12.44.31

ओं खं नमो भगवते विष्णवे वासुदेवाय विश्वरूपाय सर्वाय सर्व अने सर्वभूतव्यवस्थिताय ओम् ।30।
ओं ओं नमो भगवते विष्णवे वासुदेवाय यज्ञाय यज्ञनेत्राय यज्ञभोक्त्रे नमो नमः

12.44.32

ओं नमस्त्वनन्ताय सहस्रमूर्तये विष्णवे वासुदेवाय वेदाय मूर्तये नमः। ओम्

12.44.33

ओं नमः सर्वमुद्राभ्यः

12.44.34

ओं कमलवासिन्यै नमः

12.44.35

ओं भुं पुष्ट्यै नमः

12.44.36

ओं ह्रीं मेधायै नमः ह्रीं ओम्

12.44.37

ओं सं सरस्वत्यै नमः सं ओम्

12.44.38

ओं ह्रीं ह्रीं सं ओं ह्रीं दुर्गायै नमः।
ओं ह्रीं ओं ह्रीं सन्दे नमः ओम्

12.44.39

ओं गणपतये विघ्ननायकाय नमः ओम्

12.44.40

ओं क्षैं नमः पराय परमेष्ठ्यात्मने नमः

12.44.41

ओं यां नमः पराय पुरुषात्मेन नमः

12.44.42

ओं रां नमः पराय विश्वात्मेन नमः

12.44.43

ओं वां नमः पराय निवृत्यात्मने नमः

12.44.44

ओं लां नमः पराय सर्वात्मने नमः

मूल पाठ: Viṣvaksenasaṃhitā · Edition: Lakshmi Narasimha Bhatta, Tirupati 1972 (Kendriya Sanskrit Vidyapeetha Series, 17) · Data entry members of the Sansknet Project · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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