ग्रंथ पाठ
वाक्यपदीय · अध्याय 3.14.1
3.14.1.26
शौर्पिके मासजाते च परिमाणं स्वभावतः
उपाधिभूताम् आश्रित्य संख्यां भेदेन वर्तते ॥
मूल पाठ: Vākyapadīya · Data entry Yves Ramseier · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0