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ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 8.1.195

8.1.195.1

त्áत्-प्úर्úषाय विद्म्áहे महा-सेनाय धीमहि
त्áन् नष् षण्-मुखः[*945] प्रचोद्áयात्

8.1.195.2

भास्कराय विद्म्áहे महद्-द्युति-कराय[*946] धीमहि
त्áन् नो आदित्यः[*947] प्रचोद्áयात्

8.1.195.3

वैश्वानराय विद्म्áहे लालीलाय[*948] धीमहे
त्áं नो अग्निः प्रचोद्áयात्

8.1.195.4

कात्यायनाय[*949] विद्म्áहे कन्य-कुमारि[*950] धीमहि
त्áन् नो दुर्गिः प्रचोद्áयात्

8.1.195.5

त्áथ् सवित्úर् व्áरेण्यं भ्áर्गो देव्áस्य धीमहि
ध्íयो य्ó नः प्रचोद्áयात्
[*945] महानु (उस्): षष्टः (स्व्): षण्-मुखः
[*946] व्म्प्: मह-द्युति-कराय; महानु (स्व्): महद्-द्युति-कराय; (उस्): दिवाकराय
[*947] महानु (उस्): सूर्यः
[*948] महानु (उस्): लालेलाय
[*949] महानु (उस्): कात्यायन्यै; (स्व्): कात्यायानाय
[*950] महानु (उस्): कन्या-कुमार्यै

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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