भाषा

ENहिગુ
ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.2

7.1.2.1

[1.6] य्ó ब्रह्म-शब्द्áः प्र्áणवः प्रधान्á-शब्द्áश्[*460] श्áब्दान्तरात्मा न्íत्यो[*461] वियत्त्áः[*462] प्र्áतरन् प्रकामम्
प्राजापत्य्áं प्र्áतरन् प्रकुर्व्áन् भूय्ó भूत्यí व्íचर्áञ्[*463] चराय स्वाहा

7.1.2.2

[1.7] य्ó वा त्र्í-मूर्त्íः प्áरमः परश् च्á त्र्í-गुणं जुषाण्áस् स्áकलं विधत्त्é त्र्íस्-त्रिस् त्रि-धात्मा[*464]त्र्í-धा त्रि-धा वा व्íदधे सम्áस्तं
त्रि-धा त्रि-रूप्áं स्áकलन्-धराय स्वाहा

7.1.2.3

[1.8] यद् वा क्र्̥त्áम् अम्áरञ्[*465] च्áराणां य्áत् सर्व-निष्ट्áम्[*466] अम्ŕ̥तं[*467] स्áमस्तम् य्áत् प्áश्यमानम् आत्माभिजुषाण्áम् áन्तस् सुध्र्̥त्यानभ्íगम्यमानाय[*468] स्वाहा

7.1.2.4

[1.9] कः कोशम् अङ्ग्é क्úशलं विधाय साकूत्áङ्[*469] क्र्̥णुते[*470] ऽग्र्á इद[ग्]ं सु-कान्त्áम् क्áकुद्वत्é काम-चर्áञ् चराय स्वाहा

7.1.2.5

[1.10] य्áं यज्ञíर् म्úनयो जुष्áन्ति य्áन् देवाः प्áरमं पव्íत्रं भजिष्य्áन्त्य्[*471] आर्तिषु प्र्áणताः प्रधानाः यं सूरयो जपन्त्ó य्óगिन्áस् सूक्ष्मैस् स्úप्रदर्शनैः प्áश्यन्तीश्वराय स्वाहा.
[*460] उस् प्रधानः शब्दः
[*461] उस् शब्दान्तरात्म-नित्यो
[*462] उस् वियन्तः यत्तः
[*463] उस् अचरम्
[*464] उस् ओमित्स् त्रिस्-त्रिस् त्रि-धात्मा
[*465] उस् अम्र्̥तम्
[*466] उस् सर्व-निष्ठम् wहिछ् सेएम्स् चोर्रेच्त्.
[*467] उस् अजरम्
[*468] उस् सुषुप्त्यानभिगम्यमानाय
[*469] उस् साक्र्̥तम्
[*470] उस् क्र्̥ण्वते
[*471] उस् भविष्यन्ति

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

Esc