वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.0
उद्वहाय स्वाहेश्वराय स्वाहा
यिष्यसि स्वाहा मायíषा ते स्वाहा
ज्य्óतिषे स्वाहा पराय स्वाहा
भूम स्वाहा सत्याय स्वाहा
रूपाय स्वाहा पादिते स्वाहा
व्áरदाय पित्रे स्वाहा स्úर्éश्á-प्íत्रे स्वाहा
य्áदास्त्é स्वाहा भ्áद्रे स्वाहा
स्áम्áग्र[ग्ग्]ं स्वाहा बलाय स्वाहा
स्áन्ते स्वाहा हराय[*697] स्वाहा
[*697] थे 1984 एदितिओन् रेअद्स् साराय.
त्éजसे स्वाहा पराय स्वाहा
प्íत्र्é स्वाहा द्वे च
[*737] थिस् छप्तेर् मिस्सिन्ग् इन् उस्.
[*738] ब्ब्: स्áञ्जनित्र्á
[चोलोफोन्:]
ह्áरिः ओम्
तत्थ् सत्
श्री रामचन्द्रार्पणम् अस्तु
श्री श्री श्री-न्íवासाय नमः
श्री-वैखानस-मन्त्रप्रश्नाष्टके
सप्तम-प्रश्नः
पारमात्मिकोपनिषत्
श्री श्री निवास दीक्षितीय भाष्यानुसारी
हरिः ओं
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0