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ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.1.11

7.1.11.1

[6.1] स्वयम् आदिस् स्áर्वान्तरात्मा देव्áस्[*573] स्व्áय्áं क्रीडात्मकं वास्र्̥जत्[*574]
य्áस् स्वय्áं लोक्áम् áवधार्áम्[*575] áवधारयन् स्वाहा

7.1.11.2

[6.2] य्áस् स्वय्áं स्र्̥ष्त्áम् आत्म्áना गुप्त्áम् áनु तं वितान्áम्[*576] áचरं चरन्तम्
स्वय्áं क्रीडन्[*577] क्रीड्áयन् क्रीडान्तरम् áनुप्राविशन्[*578] स्वाहा

7.1.11.3

[6.3] स्वúजसा स्áर्वम् आदधाति य्áः पापीयांसम् áनुप्áदम् आह्í[ग्]ंसत्
सुपुण्यं प्úण्यात्मकं प्úण्य-वितान्áन्[*579] दधार[*580] देवाय स्वाहा

7.1.11.4

[6.4] क्ष्माम् एकां स्áलिलावसन्नां श्रुत्वा[*581] स्वनन्तीम् áनुसंप्áतन्तीम्[*582]
स्वयम् भूत्वा वराह्ó व्áर[*583] úज्जहार[*584] त्áस्मै देवाय स्úक्र्̥ताय पित्रे स्वाहा

7.1.11.5

[6.5] य्áः कुन् ध्áरमाणः क्úन्-धरतां क्úन्-धरताम् íत्य् अवोचत्
तान्[*585] सानुमतो[*586] व्íदधत् स्व-तेजसा त्áस्मै देवाय[*587] व्áर-दाय[*588] पित्रे स्वाहा
[*573] उस् देवस्य
[*574] उस् अवास्र्̥जत्
[*575] तेxत्: अवथारम्
[*576] उस् अनुसंदितानम् रेप्लचेस् áनुतं वितान्áम्
[*577] उस् क्रीडं
[*578] उस् अनुप्राविशत्
[*579] उस् पुण्यं वितानं
[*580] उस् दाधार. तेxत्: दथार.
[*581] तेxत्: श्र्̥त्वा. उस् श्रुत्वा.
[*582] उस् अनु स्वयम्
[*583] उस् ओमित्स्
[*584] उस् जहार
[*585] उस् तां
[*586] उस् सानुमन्तो
[*587] उस् इन्सेर्त्स् हेरे वरिष्ठाय
[*588] उस् वर-प्रदाय

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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