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ENहिગુ
ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 5.1.0.41

5.1.0.41.1

हर्íण्यै स्वाहा

5.1.0.41.2

ख्यातीशाय स्वाहा

5.1.0.41.3

धात्रे स्वाहोत्संगाय स्वाहा वरुणाय स्वाहा ज्योती-रूपायै स्वाहा किष्किन्धाय स्वाहा पुरु-हूताय स्वाहारम्भाधिप्áतये स्वाहा

5.1.0.41.4

भूतात्मकाय स्वाहादित्याय स्वाहा मन्दाय स्वाहा श्रविष्ठ-जाय स्वाहा सोमाय स्वाहा भीमाय स्वाहा पुरुषात्मकाय स्वाहा कलि-प्áत्न्यै स्वाहा वेग्íन्यै स्वाहा प्रवाह्íन्यै स्वाहार्वव्áत्यै स्वाहा पौर्णमास-भ्र्̥ताय स्वाहा निष्क-सून्áवे स्वाहानसूया-वराय स्वाहाभुरण्याय स्वाहा मह्यै स्वाहाधीत्यकाय स्वाहा रमणकाय स्वाहा पिङ्गलायै[*269] स्वाहा ष्áण्-मुख्यै स्वाहा कौश्íक्यै स्वाहा फुल्लाय स्वाहा श्वेत-वर्णाय स्वाहा विनायकाय स्वाहात्युच्छ्रिताय स्वाहा महा-भूताय स्वाहा चत्वार्í च
[*269] तेxत्: पिङ्गळायै
5.1.0.42[*270] प्रियतां भ्áगवान् रुद्र्áं भूत्áं न्íर्दग्ध(ग्)ं र्áक्षश् शुद्धा इम्é आयात्ú भ्áगवान् इम्é बीजा ब्र्áह्माणम् आवाहयामि य्ó ऽजः पुरा मेद्íनी देवी व्íष्णुर् मां पात्व् अस्म्íन् देश्é प्र्á त्áद् व्íष्ण्úर् ह्íरण्य-वर्णाः प्áवमानस् स्úवर्-ज्áनो म्éदसे न्áम éतो न्व् íन्द्रं व्íष्णुर् मां पातु रुधिराय त्व्áचे न्áमो जीवाय न्áमो ब्र्áह्म जज्ञान्áम् आचार्य्áं त्वाम् अहं वास्तोष्-पते मúलि-मालायै[*271] स्वाहा स्थूपिकायै स्वाहा शुद्धा इम्é शुक्र्áम् अस्य् अग्न्íम् ईले गार्हपत्य-यज्ञ्áम् आवाहयामीष्é त्वोर्ज्é त्वापो वा इद्á(ग्)ं स्áर्वम् आत्मात्माण्óर् áणीयान् áतो देवा इद्áं व्íष्णुर् óम् आयात्ú भ्áग्áवान् áथ्áर्व्á-व्éदम् आवाहयामि धारासु सप्तस्ú व्éदाह्áम् एत्áम् óं व्íष्णुम् आवाहयाम्य् ओं होतर् एहि व्íष्णवे स्वाहíक-चत्वारि(ग्)म्शत्
[*270] 41 इन् बोओक्
[*271] तेxत्: मौळिमालायै

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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