ग्रंथ पाठ
नाटकचन्द्रिका · श्लोक 269-269
269
बीभत्से करुणे चारभटी वीरे भयानके ।
प्रायो रसेषु सर्वत्र भारती करुणादिषु
मूल पाठ: Nāṭakacandrikā · Data entry n.n. · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0