खट्टा फल, बच्चे की भूख और आत्मा: महर्षि गौतम का तार्किक प्रमाण
न्याय सूत्रों में महर्षि गौतम ने रोजमर्रा के अनुभवों, इंद्रियों के तालमेल और नवजात शिशु के व्यवहार से आत्मा के नित्य अस्तित्व को तार्किक रूप से सिद्ध किया।
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न्याय सूत्र पर लेख: इसकी शिक्षाएँ, कथाएँ और अर्थ, सरल शब्दों में।
न्याय सूत्र सनातन दर्शन परंपरा के षड्दर्शनों में प्रमुख न्याय दर्शन का आधारभूत ग्रंथ है। पारंपरिक रूप से इसके रचयिता महर्षि अक्षपाद गौतम माने जाते हैं। इस ग्रंथ में सूत्र शैली के माध्यम से तर्कशास्त्र, प्रमाणमीमांसा और तत्त्वज्ञान के सोलह पदार्थों का गंभीर विवेचन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य मिथ्या ज्ञान को दूर कर मोक्ष प्राप्त करना है।
न्याय सूत्रों में महर्षि गौतम ने रोजमर्रा के अनुभवों, इंद्रियों के तालमेल और नवजात शिशु के व्यवहार से आत्मा के नित्य अस्तित्व को तार्किक रूप से सिद्ध किया।