परम विषयी: बृहदारण्यक उपनिषद में आत्मा की ज्ञानमीमांसा
याज्ञवल्क्य के अज्ञेय ज्ञाता, परम विषय, और चेतना की कठिन समस्या (Hard Problem of Consciousness) के साथ इसके आश्चर्यजनक संबंध की गहन पड़ताल।
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बृहदारण्यकोपनिषद पर लेख: इसकी शिक्षाएँ, कथाएँ और अर्थ, सरल शब्दों में।
बृहदारण्यक उपनिषद् शुक्ल यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मण का अंतिम भाग और मुख्य उपनिषदों में सर्वाधिक विशाल ग्रंथ है। यह मुख्य रूप से महर्षि याज्ञवल्क्य के उपदेशों और राजा जनक, गार्गी तथा मैत्रेयी के साथ उनके दार्शनिक संवादों पर आधारित है। इसमें आत्मा और परब्रह्म की एकता, 'अहं ब्रह्मास्मि' महावाक्य तथा 'नेति नेति' का तात्विक विवेचन मिलता है।
याज्ञवल्क्य के अज्ञेय ज्ञाता, परम विषय, और चेतना की कठिन समस्या (Hard Problem of Consciousness) के साथ इसके आश्चर्यजनक संबंध की गहन पड़ताल।