वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 8.1.59
नील-जीमूत-स्áन्निभाय शङ्ख-धराय[*811] नारायणाय व्áषट्
पद्म-क्íञ्जल्क-स्áन्निभाय हल-धराय व्íष्णवे ह्úम्
अरविन्दाभाय मुसल-धराय मधुसूदनाय वúषट्
ज्वलन-प्र्áभाय खड्ग-धराय त्रिव्íक्रमाय फ्áट्
तरुणादित्य-स्áन्निभाय वज्र-धराय वामनाय न्áमः
पुण्डरीकाक्षाय पट्टस-धराय श्रीधराय स्वाहा
इन्दीवर-द्áल[*812]-श्यामाय कौमोदकी-धराय ग्áदा-धराय व्áष्áट्
विद्युत्-प्रभाय मुद्गर-धराय ह्ŕ̥शीकेशाय ह्úम्
चित्र-वर्ण-धराय पाश-हस्ताय व्íष्णवे वौष्áट्
इन्द्र-नील-प्रभायापराजिताय व्यापि-नारायणाय फ्áट्
[*811] तेxत्: -थराय
[*812] तेxत्: द्áळ
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0