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ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.2.21

7.2.21.1

[11.1][*765] य्ó वा भूतेर् भूतिर् आसीत् सा वानन्द्áं प्रत्यानन्द्áम्
स्áंजुषन् व्रजामि[*766] सत्य्áं सत्याय स्वाहा

7.2.21.2

[11.2] सत्य्áस् सत्य्á-स्थस् सत्य्á-लोक-स्थस् सत्य्áं स्áञ्जनित्र्áम् आसीत्
सत्य्áं सत्याय र्áंहसे स्वाहा

7.2.21.3

[11.3] र्̥त्á(ग्)ं सत्य्áं áमितं पुराण्áम् आदिं जनित्र्áम् áम्र्̥तं सुर्éन्द्रम्
संज्य्óतिषां जुष्áमाणं[*767] जुषस्व स्वाहा

7.2.21.4

[11.4] áं राजिमन्त्áं स्áकलस्य गुप्त्íं स्óमे जुषन्त्áम् áम्र्̥तं बिभर्ति
र्áयिमत् सुप्úष्टिं ग्úणवन्तम् áत्र त्áस्मै सुपुण्याय व्áरदाय प्íत्रे स्वाहा

7.2.21.5

[11.5] माम् आत्म-गुप्तां स्áत्वस्य सर्व्áस्य व्íतान-रूपां संजूजुषन्तीं प्áरमां पव्íत्राम्
स्áन्तारयन्तीं स्व्áयम् अप्रम्áत्तां स्áंयोजयित्र्é व्áरदाय प्íत्रे स्वाहा
[*765] थिस् छप्तेर् मिस्सिन्ग् इन् उस्.
[*766] तेxत्: व्र्̥जामि
[*767] 1946 एदितिओन्: र्̥ष्áमाणं

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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