भाषा

ENहिગુ
ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.2.19

7.2.19.1

[10.1] या गा व्áरिष्ठा स्áहसूर् धरित्री वस्úं वसुं वí व्áसुनीह भ्áद्रा
र्éरीजयन्तो र्áजित्áं रजते स्वाहा

7.2.19.2

[10.2.] वाय्úर् अन्तरात्मा व्áहती सम्áस्तस् स्á-पुण्य देव्éति स्á सूरि-मुक्त्áः
सूरिस् स्úराणां स्úरसो ऽप्य् असुन्-द्áस् समूह्य देवाय व्áर-दाय प्íत्रे स्वाहा

7.2.19.3

[10.3] स्áर्वोप्áरिष्टाद् áधि तिष्ठत् आत्मा य्áस्योप्áरिष्टात् प्áरमस् स-मुक्त्áः
त्áं नीरजन्तम् áनुस्áंपराय स्वाहा

7.2.19.4

[10.4] त्áमस् स्áर्व-भूतम् áधुनोद् वरेण्य्áस् त्áं सत्व-रूप्áं स्áकलं प्रकाश्य
स्áंक्लेशयन्त् स्ŕ̥ष्टि-न्íमित्तये य्áस् त्áस्मै प्áरं-ब्र्áह्मणे प्áरं-ज्य्óतिषे स्वाहा

7.2.19.5

[10.5] ज्य्óतिर् ज्य्óतिषां ज्य्óतिर् óजो ब्áलं सत्व्áं सत्वात्मकं स्áंज्य्óतिर् इत्थ्áम् त्áस्मै सूक्ष्म-सूक्ष्माय त्éजसे स्वाहा
7.2.20.1[*761] [10.6] सत्व्áं सत्वात्मकं वा र्áजो र्áजस आत्मक्áम् त्áमस् त्áमस आधार्áस्
साक्र्̥त्áं त्áं निरीश्वरम् ईश्व्áराय स्वाहा

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

Esc