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ENहिગુ
ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 7.2.12

7.2.12.1

[6.6] य्ó वा प्र्̥थां प्र्áस्खलन्तीं प्र्áम्र्̥ज्याम्र्̥जांगीम्
य्á ऊर्व्óर् úपदधात् त्áस्मै मुख्याय व्áरदाय पित्रे स्वाहा

7.2.12.2

[6.7] यां गाम् उशन्तीम् úशनाभिपूर्णाम् आरक्त-नीलाम् अम्ŕ̥तां रजन्तीम्
आलालयन्[*750] लालित[*751]-कंकणां तां त्áस्मै प्रजेशाय व्áरदाय प्íत्रे स्वाहा

7.2.12.3

[6.8] प्र्áजा-पते न्á त्वद् एतान्य् अन्य्ó व्íश्वा जातानि प्áरि ता बभूव
य्áत्-कामास् ते जुहुम्áस् त्áन् नो अस्तु वय्á(ग्ग्)ं स्याम प्áतयो रयीणा(ग्)ं स्वाहा

7.2.12.4

[6.9] य्ó धूर् धुरं धूर् धुरं धूर् वराणाम्
सुधूर् धूर् असि धूर् धुराणां धूर् असि धूर्-व्áंग मे[*752] स्वाहा

7.2.12.5

[6.10] य्ó वा व्यहिंषीज् ज्áरयाजरन्त्áं त्áन् दैत्य-मुख्य्áम् अम्ŕ̥तात्म-रूप्áम्
स्úखुरं खुराणां क्íञ्चित् स्व्áन्áन्तं त्áस्मै न्र्̥सिंहाय स्úरेश-पित्रे स्वाहा
[*750] तेxत्: आलाळयन्
[*751] तेxत्: लाळित
[*752] तेxत्: मेस्

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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