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वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 6.7

6.7.1

कर्द्áमेन प्रजा भूता मयि स्áम्भव कर्द्áम्á
श्र्íयं वास्áय मे कुल्é[*353] मात्áरं पद्म-मालिनीं स्वाहा[*354]

6.7.2

आपस् स्र्̥ज्áन्तु स्निग्धानि[*355] चिक्लीत्á वस मे ग्ŕ̥ह्é
न्í च देवीं मात्áरं श्र्íयं वासय मे कुल्é स्वाहा[*356]

6.7.3

आर्द्रां[*357] पुष्क्áरिणीं पुष्ट्íं पिङ्ग्áलां[*358] पद्म-माल्íनीम्[*359]

6.7.4

चन्द्रां हिर्áण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह स्वाहा[*360]

6.7.5

आर्द्रां यष्क्áरिणीं[*361] यष्टिं सुवर्णां हेम-माल्íनीम्[*362]

6.7.6

सूर्यां हिर्áण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह[*363] स्वाहा[*364]

6.7.7

तां म आ वह ज्áतवेदो लक्ष्मीम् áनपगाम्áनीम्
य्áस्यां ह्íरण्यं प्र्áभूतं गावो दास्य्ó ऽश्वान् विन्द्éयं प्úरुषान् अह्áं स्वाहा[*365]

6.7.8

महा-देव्यí च विद्म्áहे विष्णु-पत्न्यí च धीमहि
त्áन् नो लक्ष्मीः प्रचोद्áयात् स्वाहा
[*353] र्व्ख्।व्च्: ग्र्̥हे
[*354] र्व्ख् 2.6.11 (5.87.11) (व्च् प्. 320)
[*355] तेxत्: सिग्धानि
[*356] र्व्ख् 2.6.12 (5.87.12) (व्च् प्. 172)
[*357] र्व्ख्।इस्: पक्वाम्; र्व्ख्।व्च्: आर्द्रां
[*358] तेxत्: पिङ्ग्áळां
[*359] र्व्ख् 2.6.13अ (5.87.14अ) (व्च् प्. 186)
[*360] र्व्ख् 2.6.14ब् (5.87.14च्) (व्च् प्. 366)
[*361] र्व्ख्: पुष्क्áरिणीं
[*362] र्व्ख् 2.6.14अ (5.87.13अ) (व्च् प्. 186)
[*363] र्व्ख्: म्áमा वह रेप्लचेस् म आ वह
[*364] र्व्ख् 2.6.13ब् (5.87.13च्) (व्च् प्. 1027) इन् थे अबोवे fओउर् वेर्सेस्, 5.6.7.5-8, नोते थे वरिअतिओन् बेत्wएएन् इस् अन्द् व्च् इन् थे ओर्देर् ओf चोर्रेस्पोन्दिन्ग् वेर्से नुम्बेर्स्. इस्: 2.6.13अ, 14ब्. 14अ, 13ब्. व्च्: 5.87.14अ, 14च्, 13अ, 13च्.
[*365] र्व्ख् 2.6.15 (5.87.15)

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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