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ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 5.2.67

5.2.67.1

रज्íत-प्रियायै[*309] स्वाहा

5.2.67.2

ग्र्áन्थिन्यै[*310] स्वाहा

5.2.67.3

वेग्íन्यै स्वाहा

5.2.67.4

प्रजयायै स्वाहा

5.2.67.5

प्रबर्ह्íण्यै[*311] स्वाहा

5.2.67.6

क्र्̥च्छ्र्íण्यै स्वाहा

5.2.67.7

शाख्íन्यै स्वाहा

5.2.67.8

वाह्íन्यै स्वाहा

5.2.67.9

योक्त्र्íण्यै स्वाहा

5.2.67.10

कुंठ्íन्यै स्वाहा
[*309] च्f. 5.1.174.8, रजत-प्रियायै, wहिछ् ओच्चुर्स् इन् अ सिमिलर् सेqउएन्चे ओf वेर्सेस् (इ.ए. 5.1.174.5-179.10 च्f. 5.2.66.8-72.3).
[*310] तेxत्: ग्र्áन्धिन्यै
[*311] च्f. 5.1.175.2, प्रवाहिण्यै, wहिछ् ओच्चुर्स् इन् अ सिमिलर् सेqउएन्चे ओf वेर्सेस् (इ.ए. 5.1.174.5-179.10 च्f. 5.2.66.8-72.3).

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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