ग्रंथ पाठ
वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 5.2.45
5.2.45.1
विन्ध्य-वास्íन्यै स्वाहा
5.2.45.2
स्íद्ध्यै स्वाहा
5.2.45.3
विश्वायै स्वाहा
5.2.45.4
भ्र्̥गु-प्áत्न्यै स्वाहा
5.2.45.5
स्áरस्वत्यै स्वाहा
5.2.45.6
श्र्íयै स्वाहा
5.2.45.7
ध्र्̥त्यै स्वाहा
5.2.45.8
प्áवित्र्यै स्वाहा
5.2.45.9
प्र्áम्óदायिन्यै स्वाहा
5.2.45.10
भूर्-ज्येष्ठायिन्यै स्वाहा[*296]
[*296] ज्येष्ठा देव्या षत् नाम-मन्त्रा इति मरीचिः । ज्येष्ठां पञ्चभिर् आह्वयेद् इत्य् अत्रिः
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0