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ग्रंथ पाठ

वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 5.1.155

5.1.155.1

श्रिय्é जात्áः

5.1.155.2

आयातु भगवती श्रीस् स्वर्ण-वर्णा स-गणा स-सैन्या श्री-परम-पुरुष-सहाया सह-देवताभिर् अनुमन्यताम्

5.1.155.3

या पद्मासना पद्म-हस्ता हंस-निर्याख्य-वाहिनी नित्यम् र्̥षिभिश् चानुगामिनी ताम् अजां पद्म-नेत्रीं भगवतीं श्रीम्

5.1.155.4

श्र्íयम् आवह

5.1.155.5

ध्ŕ̥तीम् आवह

5.1.155.6

प्áव्íत्रीम् आवह

5.1.155.7

प्र्áम्óदाय्íनीम् आवह

5.1.155.8

मेद्íनी देवी

5.1.155.9

आयातु भगवती हरिणी श्याम-वर्णा स-गणा स-सैन्या श्री-परम-प्úरुष-सहाया सह-देवताभिर् अनुमन्यताम्

5.1.155.10

या नीलोत्पलासना नीलोत्पल-हस्ता महा-चातक-वाहिनी नित्यम् र्̥षिभिश् चानुगामिनी ताम् अजां नीलोत्पल-नेत्रीं भ्áग्áव्áतीं ल्áम्[*252]
[*252] 1984 एदितिओन् अद्द्स् हेरे ग्लाम् पाठांतरम्: “ग्लाम् इस् अ वरिअन्त् रेअदिन्ग् (fओर् लम्)”.

मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0

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