वैखानसमन्त्रप्रश्न · अध्याय 5.1.12
शुद्धा इम्é पश्áवः
धारासु सप्त्áस्ú
स्वस्त्í नो मिमीतां[*11]
स्वस्ति-दा विश्áस् प्áतिः[*12]
नारायणाय
ओं श्éषम् आवाहयामि
मेद्íनीम् आवाहयामि
ज्य्éष्ठाम् आवाहयामि
वायुम् आवाहयामि
íन्द्रम् आवाहयामि
मर्úत आवाहयामि
[*11] र्व् 5.51.11. अल्सो श्श् 10.8.17, 12.8.9, 14.3.12; श्ग् 1.4.2, 1.15.12, 2.6.2; अश् 8.1.23, 9.5.5; म्ग् 2.15.6.
[*12] र्व् 10.152.2अ. अल्सो fओउन्द् इन् र्व् 10.152.2; अव् 1.21.1, 8.5.22; श्ब् 5.1; अद्ब् 1; त्ब् 3.7.11.4; त 10.1.9; तअ 10.55; महान् उ 20.5; अप्श् 3.12.1; व्ह्ध् 8.43.
मूल पाठ: Vaikhānasamantrapraśna, 5-8 · Edition: various South Indian editions in Telugu script · Data entry Howard Jay Resnick · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0