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ग्रंथ पाठ

श्रीकामाक्षिस्तोत्रम् · अध्याय 1

श्री कामाक्षि स्तोत्रम्
.
कारणापरचिद्रपा कञ्चीपुरसीम्नि कामपीठगता .
कांचन विहरति करूणा काष्मीरस्तबककोमलाङ्गलता .. १..
कंचन काञ्चीनिलयं करधृतकोदण्डबाणसृणिश्म् .
कठिनस्तनभरनम्रं कैवल्यानन्दकन्दमवलम्बे .. २..
ऐश्वर्यमिन्दुमौलेः ऐकात्म्य प्रकृतिकाञ्चिमध्यगताम्
ऐन्दवकिशोरशेखर मैदंपर्यं चकास्ति निगमानाम् .. ३..
लीये पुरहजाये माये तव तरूणपल्लवच्छाये .
चरणे चन्द्रभरण काञ्चीशरणे नतार्तिसंहरणे .. ४..
कामपरिपन्धिकामिनि कामेश्वरी कामपीठमध्यगते .
कामदुधा भव कमले कामकले कामकोटि कामाक्षी .. ५..
समरविजयकोटी साधकानन्दधारी
मृदुगुणपरिपेटी मुख्यकादम्बवाटी .
मुनिनुतपरिपाटी मोहिताजाण्डकोटी परमशीववघूटी
पातु मां कामकोटी .. ६..
जय जय जगदम्ब शिवे जय जय कामाक्षी जय जयाद्रिसुते .
जय जय महेशदयिते जय जय चिद्रगनकौमुदी धरे .. ७..

मूल पाठ: śrīkāmākṣistotram · Sanskrit Wikisource contributors · Sanskrit Wikisource · CC BY-SA 4.0

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