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ग्रंथ पाठ

लक्ष्मी श्लोकः · अध्याय 1

या रक्तांबुजवासिनी विलसिनी चंडांशु तेजस्विनी।
या रक्तांरुधिरांभरा हरिसखी, या श्रीमनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमंथनात्प्रकटीता विष्णुस्वया गेहीनी।
सामांपातु मनोरमा भगवती लक्ष्मी च पद्मावती॥

मूल पाठ: lakṣmī ślokaḥ · Sanskrit Wikisource contributors · Sanskrit Wikisource · CC BY-SA 4.0

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