कल्पनामण्डितिका · अध्याय 24
। क ण्ठे बद्ध्वा र् आज्ञः पादयोर् निप त्योवा च कृता + + + हं देवस्. + + + + अ द्य त् व् अदीय्. ॥।
कल्प्म् : इद्प् स्ह्त् 21।36
108र्1 ताज्ञ विधूय _ _ म् यातास्मि _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ _ _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ .य्. म् 3 औदुंबरं नृवर पुष्पम् इव प्र _ _ _ _ ^ _ ^ ^ ति जन्म कथ ं च् इद् . _ _
2 तस्य त्रिलोकमहितस्य ^ _ ^ _ _ _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ _ 4 _ क् ल् एशवध्यपटहः सुरलोकसेतु _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ च्छ्रुतिवंचितानाम्
3 संसारबन्धनपला ^ ^ _ ^ _ _ _ _ ^ वस् तद् इह को न भजेत विद्वा न् 5 जन्मान्तरे ननु सुभाषित _ ^ _ _ _ _ ^ _ ^ ^ निना जगतो .इ _ _
4 _ ष्टं शरीरम् इह शैल ^ _ ^ _ _ _ _ ^ _ ^ ^ ^ तं .इ ^ लो ^ _ _ 6 _ _ ^ पिण्डकदलीतर् उ _ ^ _ _ _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ _
व्1 _ _ क्षणार्थम् इह पूतिकडेब _ _ _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ . मुखः स्यात् 7 कृत्व् आ क् उंचनसं प्रसारणगतप्र व्याहृतप्रेक्षितं _ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ .. .ब्. _ _ ^ _
2 चेष्टितम् कायो ऽयं ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ टनाजर्जरो धाराक्लिन्नविशी र्ण पुस्तरचनाबिंबाकृतिः स्वप्स्य ति 8 ॥। ह्. ता ईदृशेन व्य्. + ..
3 न धर्मं श्रुत्वा कस् त्वया गुण्. ॥। _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ नरेश्वर गुणानाम् शृणु चाव _ ^ _ _ वि पुलाम् उत्पादय न्
4 प्रीतिम् 9 _ र्. इ ^ परप्र _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ _ _ _ _ द्वारं पर्यंतकृतश् च संसारः 10 ॥। + + यस्मिं स् .इर्लि
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109र्1 ॥। .ऋ .. .ज्. + बन्धनकलिले ।
। कायः सर्पकरण्ड इ .. ^ ^ _ _ _ ^ _ _ ^ _ _ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ ^ _ _ ^ _ ।
। _ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ ^ घातोपमास् तृष्णा चोग्र ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ ^ _ _ ^ _ ।
मूल पाठ: Kalpanāmaṇḍitikā · Edition: Heinrich Lüders: Bruchstücke der Kalpanāmaṇḍitikā des Kumāralāta. Leipzig 1926 (Kleinere Sanskrit-Texte, 2) [= repr. in: Monographien zur indischen Archäologie, Kunst und Philologie, 1: Steiner Verlag Wiesbaden 1979, pp. 113-375]. = KalpM · Data entry Klaus Wille · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0