Chandoviciti · भाग 111
इ. रेगेल्न् zउर् मेत्रिक्
इइ. छन्दोविचिति
इइइ. मेत्रिक्-लेह्र्तेxत्
इ. रेगेल्न् zउर् मेत्रिक्, वेर्स्ग्रुप्पे अ: अ.1 - अ.15
कुसुमायुधभ्_ _ _ _ _ _ _ ^ _ न मस्कृत्वा ।
मिश्रीकृतं अभिधास्ये समु _ _ _ ^ _ _ _ । 1 = छ्व्_इ_अ_1
वृत्तान्य् असंस्कृ _ _ _ _ _ _ ^ द् अन्यसंज्ञाभिः ।
दशदशषट्मच्छन्दं _ _ _ _ ^ _ _ .इ । 2 ॥ = छ्व्_इ_अ_2
_ _ .य्. कादि _ ^ थ संज्ञाभिः षडक्षरादीनि ।
श्_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ ^ । 3 ॥ = छ्व्_इ_अ_3
गाय त्र्य् उष्णीग्_ .आ शक्वर्य्य् अष् ट् इर् ध् ऋ तिश् च जगती _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ .इ । 4 ॥ = छ्व्_इ_अ_4
छ्व्_इ_अ_5 निछ्त् एर्हल्तेन्
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ । 6 ॥ = छ्व्_इ_अ_6
_ _ .ऊस्_ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ अ धस्तात् तु । 7 ॥ = छ्व्_इ_अ_7
गुरुलघुमिश्रं वृत्तं सम _ _ _ ^ _ ^ व् इषमञ् च ।
पादे _ _ _ _ _ _ ^ यु जायुजौ विषमौ । 8 ॥ = छ्व्_इ_अ_8
समविषमा _ _ _ _ _ _ _ द रूपरूपार्द्दैः ।
य्. _ _ _ _ _ _ .इञ् ग स स्यात् पदसमाप्तौ । 9 ॥ = छ्व्_इ_अ_9
@ब्: छेन्: दरूपरूपार्द्धैः@@
युक्प् आ द् ए _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ । 10 ॥ = छ्व्_इ_अ_10
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ स्व् अ र् अ व् अ सुस्वसंख् या _ _ _ _ ^ _ _ _ । 11 ॥ = छ्व्_इ_अ_11
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ खमद्ध्यनैध _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ । 12 ॥ = छ्व्_इ_अ_12
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ चतुष्टये प्रथमे ।
शेषे _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ । 13 ॥ = छ्व्_इ_अ_13
_ _ _ _ _ः स्याद् गुरुणी पानं न भास्व्^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ । 14 ॥ = छ्व्_इ_अ_14
_ _ रूपे द्वे द्वे स ^ _ चत्व् आ र् इ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ यः ॥ = छ्व्_इ_अ_15
वेर्स्ग्रुप्पे ब्: ब्1 - ब्31
एकपञ्च _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ ^ _ वृत्तः 1 ॥ = छ्व्_इ_ब्_1
एकेन देवय _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ 2 ॥ = छ्व्_इ_ब्_2
ब्रह्मऋच _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ । 3 ॥ = छ्व्_इ_ब्_3
छ्व्_इ_ब्_4-5 निछ्त् एर्हल्तेन्
... .र्. पुरः पुर ... = छ्व्_इ_ब्_6
... पुर स्ताद्बृहती जा ... = छ्व्_इ_ब्_7
_ _ _ _ _ _ _ _ तस्य द्वितीययोगाद् बृ हती ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ त्त्यौ 8 ॥ = छ्व्_इ_ब्_8
महतः परा ^ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ गताव् अन्ते । 9 ॥ = छ्व्_इ_ब्_9
.इ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ पद्भिः 10 ॥ = छ्व्_इ_ब्_10
@द्: छेन्: पङ्[क्](त्)इः@@
छ्व्_इ_ब्_11-21 निछ्त् एर्हल्तेन्
... त्. स्या ताव्. म्. श्र्. त्. प्र्. ... = छ्व्_इ_ब्_22
^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ _ _ _ प्. र्. य्. भिलक्ष्यते ।
उदीच्य _ _ ^ _ ^ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ । 23 ॥ = छ्व्_इ_ब्_23
_ .य्. वृत्तिर् य्यद् ओजयोः प्राच्यवृत्तिर् अथ शे ^ _ ^ _ ।
_ _ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ । 24 ॥ = छ्व्_इ_ब्_24
म् आत्रा दशषट्सहि ^ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ ।
_ _ _ _ _ ^ _ ^ .आ निधने च तथा पि ^ _ ^ _ । 25 ॥ = छ्व्_इ_ब्_25
... .य्. तथ् आ व्. च्. ... = छ्व्_इ_ब्_26
_ _ _ ब्. यायाः यो द्विती य _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ ङ्शो ऽन्ते व्. ल्. ह्. को वा 27 ॥ = छ्व्_इ_ब्_27
मात्राः _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ ^ दे युजतु पञ्चदशलजलो । 28 ॥ = छ्व्_इ_ब्_28
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
न च नियताक्ष ः गतयो ल्. _ _ _ म् इमाः संज्ञाः 29 ॥
प्र-परा-णि-निर्-उद्-दुः-सं व्य्-अव्-आनु- प र्य्य्-अभ्य्-अधिः प्रत् इ -स्व्- अं त् अ
अत्य्-अप्य्- ... .. .. हि तैर् गीतिकपूर्वैर् यथासंख्यम् । 30 ॥ = छ्व्_इ_ब्_30
@द्: छेन्: य्यथाश्@@
चतुर्भिर् अपि यत् पादैः संख्यागतिवि _ ^ _ ।
x x x .आप्तभि _ .इ पदेकार्थैर् विगद्यते । 31 ॥ = छ्व्_इ_ब्_31
इइ. छन्दोविचिति
तृष्टुब्-जगत्य्-अनुष्टुप् सा ग् आ था _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ यास्कपिङ्गल् असूत्र् एभ्यः ।
मित्रधरेण ^ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ .य्. कृतिः च्छन्दोविचितिः ^ _ _ _ ॥
.. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. यत् ।
तद् वृत्तं जा ति .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. । 1 ॥ = छ्व्_इइ_1_1
_ _ _ _ तुभ्.ः .ऊ .य्. .. .. द्वे नखेनम् अष्टौ च ।
_ _ _ _ _ _ _ _ ता _ ^ _ _ _म् 2 ॥ = छ्व्_इइ_1_2
@अब्: छेन्: [तु]भ्य् अ ः .ऊ .य्. .. .. द्वे नवैनम् अष्टौ च@@
अङ्गुल्य् अः पाद्गुल्यस् सर्वाः सम्यक्प्रतिष्ठि त् आ भूम् औ ।
_ सुवृ त्त् अ नाभिः कन्या ना म् आदिर् आर्य्याणाम् । 3 ॥ = छ्व्_इइ_1_3
रक्तमधुपद्मनेत्रा स्निग्धासितबहुलसूक्ष्म मृ दुकेशी ।
_ _ ^ रूरुजघना तनुवक्षांसोदरी पथ्या । 4 ॥ = छ्व्_इइ_1_4
विपुला जघनोरुपयोधरेषु ताम्रा धरोष्ठकरचरणा ।
आ यतनासाक्षिभ्रूललाटकर्णा शुभा क न्या । 5 ॥ = छ्व्_इइ_1_5
_ _ ^ लोचना चित्रलोचना क्. ^ _ ^ _ _ द्ध्या ।
कन्या विहारमद्या मिषप्रिया सर्व तश् चपला । 6 ॥ = छ्व्_इइ_1_6
अभ्युन्नतौत्तरौष्ठी प्रहास _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
रूक्षकपिलाग्रकेशीं मुख चप ला ं तादृशीं विन्द्यात् । 7 ॥ = छ्व्_इइ_1_7
@द्: छेन्: विंद्यात्@@
शशमृगवरा ^ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ ^ _ ^ गीतप्रिया सदा जघनचपला सा । 8 ॥ = छ्व्_इइ_1_8
... च गणे यदि विशेष ... = छ्व्_इइ_1_9
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ ^ पविन्द्यात् सप्तमं ^ _ _ _ । 10 ॥ = छ्व्_इइ_1_10
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ _ ।
सु .त्य्. च्. .. ञ् च् ऐ कगणे कन्या लघु _ ^ _ _ _ । 11 ॥ = छ्व्_इइ_1_11
स मुपच् इ तविनयजघनविमलदशनसमविपुलचिबुकन ^ _ ।
^ ^ ^ ^ रणरुचिरमृदुरुचितकिरणवपुर् अव .इ ^ ^ ^ म हिषीम् । 12 ॥ = छ्व्_इइ_1_12
दुर्व्वाकिसलय _ _ _ _ _ .आं विशालवेदीमध्याम् ।
कृष्णाम् अवाप्य _ _ _ _ _ _ .ऋता लघुभरा पृथि वी । 13 ॥ = छ्व्_इइ_1_13
_ _ _ _ ष्टतालुकै र् जङ्घे स्थूले सिरातते ।
खेटाडि र् यस्य लक्षणं कन्यानाम् एतज् जुगुप्सि तम् । 14 ॥ = छ्व्_इइ_1_14
@अब्: छेन्: पादाव् उत्कृ ष्टताल् अ क्[औ] जङ्घे {च} स्थूले ऽनिरातते@@
@च्: छेन्: वैताडीयस्य लक्षणं@@
_ _ श्लक्ष्णैर् घनाङ्गुलीकैः सुस्निघ्दोपचितैर् ऽभिगूढगुल्फैः ।
@रेअद् विगूढगुल्फैः?@@
सूताम्रनखैः समुन्न _ _ _ _ _ _ _ ^ _ ं लभन्ते । 15
@च्द्: छेन्: आताम्रनखैः समुन्न ताग्रैः औपच्छन्दसिकं वन ं लभन्ते@@
गोवृषनेत्रो जगतीन्द्रः उपचितमांसहनुः सु ^ _ _ ।
_ _ _ _ ^ ^ _ _ _ _ _ आपा तलि क् आयाम् । 16 ॥ = छ्व् 16
ह्स्. इम् fओल्गेन्देन् अन्देरे रेइहेन्fओल्गे
_ _ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ कृष्ट _ . ओत् तर् ओ गुण् ऐः ।
कर्णो वैकर्त्तनी वृष ः प्राच्यवृत्तिनां _ ^ . आ भ वत् । 19 ॥ = छ्व्_इइ_1_19
विशालजघना सहोदरा हरिणाक्षाः कलमन्दभाषि णः ।
^ _ ^ _ सन्निभाननास् सदृशा स्त्रीभिर् उदीच्यवृत्तिभिः । 20 ॥ = छ्व्_इइ_1_20
प्रलम्बबहुशङ्खपिण्डिकं _ ^ _ ^ _ _ ल्य नासिकम् ।
मुखं विषमदन्तलोचनं पापकर्मणि सदा प्रवृत्तकम् । 21 ॥ = छ्व्_इइ_1_21
@अ: छेन्: प्रलम्बहनुशङ्खपिण्डिकं@@
^ _ ^ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ _ _ ।
^ _ ^ _ चारुहा स् इ नी प्रिया भवत् इ _ ^ _ ^ _ । 18 ॥ = छ्व्_इइ_1_18
दीर्घसूक्ष्ममृदुभिः शि खा ^ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ ।
_ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ _ द् य् उ वतिम् आपरां त् इ काम् । 17 ॥ = छ्व्_इइ_1_17
@अ: छेन्: दीर्घसूक्ष्ममृदुभिश् शि(खा)@@
अश् मश्रुमुखो विरलैर् द न् तैः गम्भीराक्षो वलिनासाग्रः
निर्मांसहनुः कपिलैः केशैर् मात्रासमकं लभते दुः खम् । 22 ॥ = छ्व्.22
@ब्: छेन्: गंभीराक्षो वलिनासाग्रः@@
_ _ ^ रस्कविदारितास्यं पीनस्कन्धोरुदीर्घबाहुम् ।
राजानं विद्धि गोवृर्षाक्षम् भर्तारं वानवा सिकानां । 23 ॥ = छ्व्_इइ_1_23
@च्: छेन्: विद्धि गोवृषाक्षम्@@
स्त्र् ई पिङ्गल ^ _ ^ न्. य्. .ए _ _ न्तरोमशमहाग्रकटिम् ।
तीक्ष्णाग्रनासम् उ ^ _ _ _ _ _ ^ _ ^ _ _ _ _ । 24 ॥ = छ्व्_इइ_1_24
@अ: छेन्: (स्त्र्)ई पिंगल@@
_ _ ^ .ओरुजघना विपुला पक्वप्रियङ्गुनिभवर्णा _ ।
_ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ । 25 ॥ = छ्व्_इइ_1_25
_ _ _ ^ पयोधरनेत्रा घन _ _ _ _ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ । 26 ॥ = छ्व्_इइ_1_26
॥। गीत्यार्या ॥।
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ पृथुर् अप् इ च ।
शिरसि पुरुष इह कर ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ तु ल ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ .इ जगति । 1 = छ्व्_इइ_2_1
शिखा ।
सिंहस्कन्धो मूषाबाहु ः _ _ _ _ क म्ब् उ ग्रीवः
गजवृसभचरितसदृशगतिर् अपि च रुचिरवपुर् अमरसदृश इह भ वति । 2 ॥ = छ्व्_इइ_2_2
॥ चूलिका ॥
पृथुकठिनम् उरसि समविपुलशिरसम् असितघ नरव् इनदसमवचसम् ।
^ ^ ^ ^ ^ यनम् अथ बिलजठरम् अनुविशति कमलवननिन ^ _ । 3 ॥ = छ्व्_इइ_2_3
अस्थिराणि लोच नानि _ ^ _ ^ म ण्डलानि ।
तत् समानि चाननानि ध् ऋ ष् य लुब्धदारुणानि । 4 ॥ = छ्व्_इइ_2_4
अति प्रमाण्य् अधः कृशा ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ।
नरस्य गन् तु _ ^ _ स श् अ स्त्रघातम् आप्नुयात् । 5 ॥ = छ्व्_इइ_2_5
@अ: छेन्: अति प्रामाण्य् अधः कृशा@@
आज्यमहि ^ ^ _ _ _ ^ ^ _ ^ ^ _ _ ।
_ ^ ^ _ म णि च् इ त्र ं धार्यति म् ऊ र्ध् न् इ वितानम् । 6 ॥ = छ्व्_इइ_2_6
अनुद्बद्धक _ _ _ x x x x ^ _ _ _ ।
x x x x ^ _ _ _ x x x x ^ _ _ _ । 7 ॥ = छ्व्_इइ_2_7
उर्मिमूलशिरो _ _ x x x x ^ _ ^ _ ।
x x x x ^ _ _ _ x x x x ^ _ ^ _ । 8 ॥ = छ्व्_इइ_2_8
x न्. गण्डाग्रदशन् आ x x x x ^ _ _ _ ।
x x x x ^ ^ ^ _ x x x ध् ऊ र् तस् औ भ् आ ग्यम् । 9 ॥ = छ्व्_इइ_2_9
पृथुपीनमृदुश्रोणिर् x x x x ^ _ ^ _ ।
सिन्. x x ^ _ _ .आ कन्या पुत्रार्थिनी मता । 10 ॥ = छ्व्_इइ_2_10
मण्डलं शठ _ ^ _ _ ^ _ ^ ^ म् आयतम् ।
स्त्रीमुखे स्वनपत्यता दुर्भगं तु महामुखम् । 11 = छ्व्_इइ_2_11
भ-विपुला _ ^ ^
बहुसत्यं _ ^ ^ _ व् इ षमौष्ठं कालहिकम् ।
कृपनाढ्यं ह्रस्वमुखं चतु _ _ं _ र्तमुखम् । 12 ॥ = छ्व्_इइ_2_12
र-विपुल _ ^ _
_ _ _ _ _ ^ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ ।
_ _ _ _ _ ^ _ ण्डं क्रूरानार्यं _ ^ _ं स्यात् । 13 ॥ = छ्व्_इइ_2_13
@द्: छेन्: क्रूरानर्यं@@
न-विपुल ^ ^ ^
पाटि _ _ ^ ^ ^ _ _ ^ _ _ ^ ^ ^ _ ।
_ ^ _ _ ^ ^ ^ ने वाहिनीनां प्र् अ णयिता । 14 ॥ = छ्व्_इइ_2_14
त-विपुला _ _ ^
स्निग्ध ^ _ _ _ ^ _ _ _ ^ _ _ _ ^ _ ।
_ _ द्ययं देवैः स्वयं स्कन्दो वृतः सेनाप तिः । 15 ॥ = छ्व्_इइ_2_15
@च्: छेन्: द्ययं देवैस् स्वयं@@
॥ आपीडः ॥
समविमलललाटः पृथु मृदुकरतलसुकुमारः ।
उपचितमृगपतिस् उसदृशवरजानुः स भवति नरपतिर् अवनतरिपुजनसुखभोगः । 16 ॥ = छ्व्_इइ_2_16
॥ मञ्जरी ॥
ब्: पृथु मृदुकरतलसुकुमारः
अ: समविमलललाटः ।
च्: उपचितमृगपतिसुसदृशवर जानुः
द्: स भवति नरपतिर् अवनतरिपुजनसुखभोगः । 17 ॥ = छ्व्_इइ_2_17
॥ लव ली ॥
च्: उपचितमृगपत् इ सुसदृशवरजानुः
ब्: प् ऋ थुमृदुकरतलसुकुमारः ।
अ: समविमलललाटः
द्: स भवति नरपतिर् अवनतरिपुजनसु खभोगः । 18 ॥ = छ्व्_इइ_2_18
॥ अमृतधारा ॥
द्: स भवति नरपतिर् अ वनतरिपुजनसुखभोगः ।
च्: उपचित मृगपतिसुसदृशवरजानुः ।
ब्: पृथुमृदुकरतलसुकु मारः
अ: समवि मल ललाटः । 19 ॥ = छ्व्_इइ_2_19
उद्गता
^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ।
_ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ याति नौभिर् अ ^ _ ^ _ ^ _ । 20 ॥ = छ्व्_इइ_2_20
सौरभक
^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ नासिकः ।
प्रस्थितश् च यदि _ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ । 21 ॥ = छ्व्_इइ_2_21
ललित
बलिशक्तिपुष्पितलताग्रतरुणर ^ _ ^ _ ^ _ ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ जाः लडितं प्रजासु विनिवेशयन्ति ते । 22 ॥ = छ्व्_इइ_2_22
उपस्थितप्रचुपित
_ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ^ ^ _ _ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ ।
प्र चुपितम् अचिरसुखो ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ _ । 23 ॥ = छ्व्_इइ_2_23
वर्धमान
_ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ^ ^ _ .आ पुरुषे प्रविसृ त _ ^ _ ^ _ _ ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ त्. पुरुषकृतसमयम् अपि जीवति कालम् । 24 = छ्व्_इइ_2_24
शुद्धविराडृषभ
_ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ^ ^ _ _ ^ ^ _ ^ ^ ^ रदुन्द् उ भिस्वनं वा
ते सत्पुरुषाः स _ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ _ । 25 ॥ = छ्व्_इइ_2_25
उपचित्रक
^ ^ _ ^ ^ _ ख्. र्. जल्पितं जर्जरको ऽस्य र _ ^ ^ _ _ ।
^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ _ । 26 ॥ = छ्व्_इइ_2_26
द्रुतमध्या
य द्य् अपि शीघ्रग तिर् ^ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ _ ।
_ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ _ । 27 ॥ = छ्व्_इइ_2_27
वेगवती
^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ _ _ ^ ^ _ ^ .उपि ं गलनेत्रम् ।
पुरु ष् . ^ ^ सौहृद _ _ _ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ _ । 28 ॥ = छ्व्_इइ_2_28
भद्रविराट्
_ _ ^ ^ _ क्षवक्षणाक्षी गम्भीरस्वर _ ^ _ ^ _ _ ।
_ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ _ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ गी । 29 ॥ = छ्व्_इइ_2_29
केतुमती
अति _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ ।
^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ के तुमतीव्. _ ^ ^ ^ _ _ । 30 ॥ = छ्व्_इइ_2_30
आख्यानकी
_ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ _ _ ।
_ _स् समाचा ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ _ _ । 31 ॥ = छ्व्_इइ_2_31
हरिणप्लुत
^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ ह् अं सगतिः सुख्^ _ ^ _ ।
^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ । 32 ॥ = छ्व्_इइ_2_32
अपरवक्त्र
स्तनजघनन _ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ न रतिपरो ऽपरवक् त्र म् ईक्षत् ए । 33 ॥ = छ्व्_इइ_2_33
छ्व्_इइ_2_34-41 निछ्त् एर्हल्तेन्
34: पुष्पिताग्रा
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _
^ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ ।
35: यवमती
_ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^
^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ _ ।
36: शिखा
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
37: खञ्ज
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
40: तनुमध्या
_ _ ^ ^ ^ _
41: कुमारललिता
^ _ ^ ^ ^ _ _
माणवक्रीडितक
_ ^ ^ _ _ ^ _ ^ _ कप् इ लाक्षि ^ _ ^ ।
_ ^ ^ _ _ ^ _ ^ _ ^ ^ _ _ ^ _ ^ । 42 ॥ = छ्व्_इइ_2_42
चित्रपदा
_ ^ ^ _ ^ ^ _ _ श् र् ओणिपयोधरगुर्वी ।
_ ^ ^ _ ^ ^ _ _ _ ^ ^ _ _ ^ _ _ । 43 ॥ = छ्व्_इइ_2_43
भुजगशिशुसृता
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ श्रोणी नयनकर ^ _ _ _ ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ । 44 ॥ = छ्व्_इइ_2_44
_ त्त्.ः सूक्ष्मसमैस् सिव्_ ^ _ _ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ।
_ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ _ _ ^ ^ _ प्र् इयंवदा । 45 ॥ = छ्व्_इइ_2_45
यस्त्. ...
मत्ता
_ _ न्धार्हः स तु ^ ^ _ _ _ _ _ _ ^ ^ ^ ^ _ _ ।
_ _ _ _ ^ ^ ^ ^ _ _ _ _ _ _ ^ ^ ^ ^ _ _ । 47 ॥ = छ्व्_इइ_2_47
इन्द्रवज्रा
_ माग्रहस्ताक्षिनखे ^ _ _ _ _ ^ _ _ ^ ^ _ र् ल लाटम् ।
निर्क्_ ^ _ .ए ^ ^ _ ^ _ _ _ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ ह न्यात् । 48 ॥ = छ्व्_इइ_2_48
उपेन्द्रवज्रा
उ प् ए न्द्रवज्रा ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ _ _ ।
^ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ _ ^ ^ _ ^ _ _ । 49 ॥ = छ्व्_इइ_2_49
शालिनी
_ _ _ _ _ ^ _ _ ^ _ _ _ _ _ _ द क्षिणावर्तनाभिः ।
_ _ _ _ _ ^ _ _ ^ _ _ _ _ _ _ _ ^ _ _ ^ _ _ । 51 ॥ = छ्व्_इइ_2_51
वातोर्मी
_ _ _ गी विकटाकारजन्. _ _ _ _ । ^ ^ _ _ ^ _ _ ।
_ _ _ _ । ^ ^ _ _ ^ _ _ _ _ कन्या द्रुतवातोर्मिलो ला । 52 ॥ = छ्व्_इइ_2_52
भ्रमरविलसित
_ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
कु र्यात् प्रीतिं पतियश ^ ^ _ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । 53 ॥ = छ्व्_इइ_2_53
रथोद्धता
_ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ ^ . ई प्स् इ तम् उपैति कन्य का ।
_ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ । 54 ॥ = छ्व्_इइ_2_54
स्वागता
_ ^ _ ^ दशने तनुजिह्वे द्र् ओ णिका वि ^ ^ _ ^ ^ _ _ ।
_ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ _ _ ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ .मी । 55 ॥ = छ्व्_इइ_2_55
वृण्ता
चर ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ । 56 ॥ = छ्व्_इइ_2_56
श्येनी
श्येन गृद्ध्रवायसा ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ।
_ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ । 57 ॥ = छ्व्_इइ_2_57
चत्.नो 654 fओल्. 16व्5 ... पे .. .इ .इ .. पि च
चत्.नो 654 fओल्. 17र्1 ... .. रुख ..
चत्.नो 654 fओल्. 17र्2 ... लसूक्ष्म ..
चत्.नो 654 fओल्. 17र्3 ... रसि ग
चत्.नो 654 fओल्. 17र्4 -
चत्.नो 654 fओल्. 17र्5 -
चत्.नो 654 fओल्. 17व्1 -
चत्.नो 654 fओल्. 17व्2 -
चत्.नो 654 fओल्. 17व्3 ... व भ्.
चत्.नो 654 fओल्. 17व्4 ... ..म् । ला ..
चत्.नो 654 fओल्. 17व्5 ... हंसै .. ..
वैश्वदेवी
_ _ _ _ _ । _ ^ _ _ ^ _ _ _ _ _ _ _ । _ ^ _ _ ^ _ _ ।
_ _ _ _ _ । _ ^ _ _ ^ _ _ _ _ _ _ _ व् ऐ श्वदेवी तनुस् स्यात् । 65 ॥ = छ्व्_इइ_2_65
नवमालिनी
^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ ।
^ ^ ^ ^ तालसस्यसदृशी वा ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ । 66 ॥ = छ्व्_इइ_2_66
प्रहर्षिणी
_ _ _ । ^ ^ व् इ पुलोन्नत्. _ ^ _ .आ व्यालंबोपभितवी _ ^ _ ^ _ _ ।
_ _ _ । ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ । 1 ॥ = छ्व्_इइ_3_1
रुचिरा
^ _ ^ वो भवति तनुः ^ .आर्.उणी सि _ ^ _ । ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ।
^ _ ^ _ । ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ । ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ । 2 ॥ = छ्व्_इइ_3_2
चत्.नो 654 fओल्. 18र्5 स्. .. भि ..
असंबाधा
_ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ मृष्टा कम्बुग्रीवसज ^ ^ ^ _ _ _ ।
_ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ _ _ _ ग्यानाम् उरसि तनुर् अ संबाधा । 4 ॥ = छ्व्_इइ_3_4
अपराजिता
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ गजाङ्कुशनासिका ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । ^ _ ^ ^ _ ^ _ । 5 ॥ = छ्व्_इइ_3_5
छ्व्_इइ_3_6 निछ्त् एर्हल्तेन्
वसन्ततिलका
_ _ ^ _ ^ ^ ^ _ सि ललाटपात्रं स्निग्ध ^ _ ^ ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ _ ।
_ _ ^ _ ^ ^ ह वृत्तवरेव नार् ई क्षिप्रं वसन्ततिलक् आ ^ ^ _ ^ _ _ । 7 ॥ = छ्व्_इइ_3_7
चन्द्रावर्ता
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ खे यदि च भवति मृगपतिसदृशा ^ _ ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ च नरपतिर् अमरसमः । 8 ॥ = छ्व्_इइ_3_8
माला
विपुल ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ च रणपदम् ।
अकुलजम् अपि पति .इ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ .इ ^ ^ प .इ । 9 ॥ = छ्व्_इइ_3_9
मणिगुणनिकर
उरुभरम् अविषम ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । 10 ॥ = छ्व्_इइ_3_10
मालिनी ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ । _ ^ _ _ ^ _ _
ऋषभगजविलसित _ ^ ^ _ ^ _ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
शिखरिणी ^ _ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ _ _ ^ ^ ^ _
पृथिवी ^ _ ^ ^ ^ _ ^ _ । ^ ^ ^ _ ^ _ _ ^ _
वंशपत्रपतित _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
हरिणी ^ ^ ^ ^ ^ _ । _ _ _ _ । ^ _ ^ ^ _ ^ _
मन्दाक्रान्ता _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ _ । _ ^ _ _ ^ _ _
कुसुमितलतावेल्लिता _ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ _ । _ ^ _ _ ^ _ _
शार्दूलविक्रीडित _ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ । _ _ ^ _ _ ^ _
सुवदना _ _ _ _ ^ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । _ _ ^ ^ ^ _
वृत्त _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^
स्रग्धरा _ _ _ _ ^ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । _ ^ _ _ ^ _ _
मद्रक _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ । ^ _ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _
अश्वललित ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ । ^ ^ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _
मत्ताक्रीडा _ _ _ _ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
तन्वी _ ^ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । _ ^ ^ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
क्रौञ्चपदा _ ^ ^ _ _ । _ ^ ^ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ _
भुजङ्गविजृम्भित _ _ _ _ _ _ _ _ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ । ^ _ ^ ^ _ ^ _
अपवाहक _ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ ^ ^ ^ ^ । ^ ^ _ _ _
दण्डक ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _
इइइ. मेत्रिक्-लेह्र्तेxत्, 1. अब्स्छ्नित्त्
छ्व्_इइइ_1_1-25 निछ्त् एर्हल्तेन्
श्रीपुतोष्ठी
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ लैः श्रीपुतोष्ठ् ई ।
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ _ रम् । 26 ॥ छ्व्_इइइ_1_26
प्रभावति ओदेर् रुचिरा
द् व् इ _ ^ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ।
^ _ ^ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ । 27 ॥ छ्व्_इइइ_1_27
प्रहर्षिणी
_ _ _ ^ ^ ^ ^ _ र्विमिश्रपादं श्. _ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ ।
_ _ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ मद्रिली .ए _ _ _ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ ^ _ _ । 28 ॥ छ्व्_इइइ_1_28
छ्व्_इइइ_1_29-36 निछ्त् एर्हल्तेन्
चत्.नो 654 fओल्. 30र्1 ... च्. .. .. ब्ज्. ब्द्. द्वे ...
शिखरिणी
^ _ न् मिश्रैः पादैः तुरङ्गमहि _ _ ^ ^ ^ _
^ _ _ ब्जब्दार्कैर् गगनम् ऋतुरुद्रैः शिख रिणीम् ।
^ _ _ _ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ ^ ^ ^ _
^ _ _ _ पादैर् विधिविचरितैः .औ ^ ^ ^ _ । 38 ॥ छ्व्_इइइ_1_38
शार्दूलविक्रीडित
_ _ अ ङ्शुधरानलार्कगिर _ _ _ ^ _ _ ^ _
_ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ शार्दूलविक् रीडितम् ।
तत्पादैः परिमिश्र _ ^ ^ ^ _ _ _ ^ _ _ ^ _
_ _ _ ^ ^ _ ^ _ ^ ^ ^ _ _ _ ^ तिः प्रोच्यते । 40 ॥ छ्व्_इइइ_1_40
सुवदना
चत्वार् इ _ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ ^ ^ _
_ _ _ _ ^ _ _ ^ ^ खलु भवतः सा .आ ^ ^ ^ _ ।
_ _ _ _ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ ^ ^ _
_ _ _ _ ^ _ _ ^ ^ ^ ^ ^ ^ _ _ _ ^ ^ ^ _ । 41 ॥ छ्व्_इइइ_1_41
छ्व्_इइइ_1_42-44 निछ्त् एर्हल्तेन्
मेघमाला उन्द् दण्डक
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ दृश्यते मिश्रपाद ं व्. _ _ ^ _
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _
नियुतम् इह तद् उदधिश्य ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ मेघमाला भवेत् ।
अथ खलु ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ र् बुधा दण्ड क म् ।
अपि च द ^ ^ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _ _ ^ _
^ ^ ^ ^ ^ ^ _ ^ _ _ घता _ ^ .ए ते ऽर्णव _ ^ _ _ ^ _
........ याद् ध्.आ ... ऋ छ्व्_इइइ_1_45-46 ?
2. अब्स्छ्नित्त्
वेर्स् 1-4 वक्त्र
प्र्. x x x ^ _ _ _ x x x x ^ _ ^ _ ।
x x x x ^ _ _ _ x x x x प् तथा ग्व्. न्न्. । 1 ॥ = छ्व्_इइइ_2_1
पथ्या
अथ वक्त्रस्य _ _ _ x x x x ^ _ ^ _ ।
x x x x ^ _ _ _ x x x x म् अथापरे । 2 ॥ = छ्व्_इइइ_2_2
विपरीता
अथायुङोश् च _ ^ _ x x x x ^ _ _ _
x x x ^ _ ^ _ x x x x ^ _ व क्त्रे । 3 = छ्व्_इइइ_2_3
विपुला
वक्त्रस्य स्युर् य्युक्चरणे य्. x x x ^ _ ^ _ ।
x x x x _ ^ ^ _ x x x x ^ _ ^ _ । 4 ॥ = छ्व्_इइइ_2_4
पदचतुरूर्ध्व
प्रतिपादं चतुर्व् ऋ द्ध्या x x x x x x x x x x x x ।
x x x x x x x x x x x x x x x x
x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x । 5 ॥ = छ्व्_इइइ_2_5
मूल पाठ: Chandoviciti · Edition: Dieter Schlingloff: Chandoviciti, Texte zur Sanskritmetrik, Berlin 1958 (Sanskrittexte aus den Turfanfunden, 5). = ChV · Data entry Klaus Wille · GRETIL (Göttingen) · CC BY-NC-SA 4.0