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ग्रंथ पाठ

अथर्ववेद · अध्याय 8.11

8.11.8

सोदक्रामत्सान्तरिक्षे चतुर्धा विक्रान्तातिष्ठत्

8.11.9

तां देवमनुष्या अब्रुवन्न् इयमेव तद्वेद यदुभय उपजीवेमेमामुप ह्वयामहा इति

8.11.10

तामुपाह्वयन्त

8.11.11

ऊर्ज एहि स्वध एहि सूनृत एहीरावत्येहीति

8.11.12

तस्या इन्द्रो वत्स आसीद्गायत्र्यभिधान्यभ्रमूधः

8.11.13

बृहच्च रथंतरं च द्वौ स्तनावास्तां यज्ञायज्ञियं च वामदेव्यं च द्वौ

8.11.14

ओषधीरेव रथंतरेण देवा अदुह्रन् व्यचो बृहता

8.11.15

अपो वामदेव्येन यज्ञं यज्ञायज्ञियेन

8.11.16

ओषधीरेवास्मै रथंतरं दुहे व्यचो बृहत्

8.11.17

अपो वामदेव्यं यज्ञं यज्ञायज्ञियं य वेद

मूल पाठ: atharvavedaḥ · Sanskrit Wikisource contributors · Sanskrit Wikisource · CC BY-SA 4.0

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