ग्रंथ पाठ
अथर्ववेद · अध्याय 7.19
7.19.1
7.19(7.18)
प्र नभस्व पृथिवि भिन्द्धीदं दिव्यं नभः ।
उद्नो दिव्यस्य नो धातरीशानो वि ष्या दृतिम्
7.19.2
न घ्रंस्तताप न हिमो जघान प्र नभतां पृथिवी जीरदानुः ।
आपश्चिदस्मै घृतमित्क्षरन्ति यत्र सोमः सदमित्तत्र भद्रम्
मूल पाठ: atharvavedaḥ · Sanskrit Wikisource contributors · Sanskrit Wikisource · CC BY-SA 4.0