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ग्रंथ पाठ

अथर्ववेद · अध्याय 19.22

19.22.1

आङ्गिरसानामाद्यैः पञ्चानुवाकैः स्वाहा

19.22.2

षष्ठाय स्वाहा

19.22.3

सप्तमाष्टमाभ्यां स्वाहा

19.22.4

नीलनखेभ्यः स्वाहा

19.22.5

हरितेभ्यः स्वाहा

19.22.6

क्षुद्रेभ्यः स्वाहा

19.22.7

पर्यायिकेभ्यः स्वाहा

19.22.8

प्रथमेभ्यः शङ्खेभ्यः स्वाहा

19.22.9

द्वितीयेभ्यः शङ्खेभ्यः स्वाहा

19.22.10

तृतीयेभ्यः शङ्खेभ्यः स्वाहा

19.22.11

उपोत्तमेभ्यः स्वाहा

19.22.12

उत्तमेभ्यः स्वाहा

19.22.13

उत्तरेभ्यः स्वाहा

19.22.14

ऋषिभ्यः स्वाहा

19.22.15

शिखिभ्यः स्वाहा

19.22.16

गणेभ्यः स्वाहा

19.22.17

महागणेभ्यः स्वाहा

19.22.18

सर्वेभ्योऽङ्गिरोभ्यो विदगणेभ्यः स्वाहा

19.22.19

पृथक्सहस्राभ्यां स्वाहा

19.22.20

ब्रह्मणे स्वाहा

19.22.21

ब्रह्मज्येष्ठा सम्भृता विर्याणि ब्रह्माग्रे ज्येष्ठं दिवमा ततान ।
भूतानां ब्रह्मा प्रथमोत जज्ञे तेनार्हति ब्रह्मणा स्पर्धितुं कः

मूल पाठ: atharvavedaḥ · Sanskrit Wikisource contributors · Sanskrit Wikisource · CC BY-SA 4.0

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