भगवद्गीता का विश्वरूप दर्शन: ब्रह्मांडीय दृष्टि और अहंकार का अंत
भगवद्गीता के 11वें अध्याय के विश्वरूप दर्शन का गहरा विश्लेषण। जानें कि अहंकार का नाश, काल (समय) और आधुनिक विज्ञान का 'ब्लॉक यूनिवर्स' सिद्धांत कैसे जुड़ते हैं।
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भगवद्गीता पर लेख: इसकी शिक्षाएँ, कथाएँ और अर्थ, सरल शब्दों में।
श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के भीष्म पर्व का एक प्रमुख दार्शनिक और आध्यात्मिक अंग है। पारंपरिक रूप से महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित इस ग्रंथ में कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और धनुर्धर अर्जुन के बीच हुआ गूढ़ संवाद प्रस्तुत है। यह निष्काम कर्मयोग, आत्मा के शाश्वत स्वरूप, स्वधर्म के पालन तथा ज्ञान और भक्तियोग के समन्वय का गंभीर उपदेश देती है।
भगवद्गीता के 11वें अध्याय के विश्वरूप दर्शन का गहरा विश्लेषण। जानें कि अहंकार का नाश, काल (समय) और आधुनिक विज्ञान का 'ब्लॉक यूनिवर्स' सिद्धांत कैसे जुड़ते हैं।