ऐतरेय उपनिषद: चेतना और ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य
"जानें ऐतरेय उपनिषद के अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति का वास्तवि सिद्धांत, जहां भौतिक पदार्थ नहीं, बल्कि शुद्ध चेतना ही संपूर्ण सृष्टि का परम आधार है।"
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ऐतरेयोपनिषद पर लेख: इसकी शिक्षाएँ, कथाएँ और अर्थ, सरल शब्दों में।
ऐतरेय उपनिषद ऋग्वेद से संबंधित मुख्य उपनिषदों में परिगणित है, जिसका श्रेय पारंपरिक रूप से ऋषि महिदास ऐतरेय को दिया जाता है। इस ग्रंथ में परमात्मा द्वारा सृष्टि की रचना, जीवात्मा के स्वरूप तथा चेतना का निरूपण किया गया है। वेदान्त का प्रसिद्ध महावाक्य "प्रज्ञानं ब्रह्म" इसी उपनिषद से है, जो विशुद्ध चेतना को ही परमतत्त्व घोषित करता है।
"जानें ऐतरेय उपनिषद के अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति का वास्तवि सिद्धांत, जहां भौतिक पदार्थ नहीं, बल्कि शुद्ध चेतना ही संपूर्ण सृष्टि का परम आधार है।"